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उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) में टूट की अटकलें तेज, 6 सांसदों के शिंदे गुट में जाने की चर्चा

मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर शिवसेना में टूट की आशंका बढ़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद मंगलवार देर रात दिल्ली पहुंचे हैं। संभावना जताई जा रही है कि ये सांसद बुधवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं। इसके साथ ही सांसदों की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने की भी चर्चा है।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना के शिंदे गुट के प्रमुख एकनाथ शिंदे के भी दिल्ली रवाना होने की खबर सामने आई है। शिंदे गुट के एमएलसी कृपाल तुमाने ने दावा किया है कि ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत पिछले एक महीने से बातचीत चल रही थी और अब यह अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र से पहले कुछ सांसद शिंदे गुट में शामिल हो सकते हैं।

हालांकि शिवसेना (UBT) ने इन अटकलों को खारिज करते हुए लोकसभा स्पीकर को पत्र लिखा है। पार्टी ने मांग की है कि संसद में किसी भी बागी गुट को अलग मान्यता नहीं दी जाए। पार्टी का कहना है कि संविधान के मौजूदा प्रावधानों के अनुसार किसी राजनीतिक दल में विभाजन को अब कानूनी मान्यता नहीं मिलती।

शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भी पार्टी में संभावित टूट पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जिसे जाना है, वह जा सकता है। उद्धव ने 2022 की बगावत का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी उन्हें विद्रोह की जानकारी थी, लेकिन उन्होंने किसी पर दबाव नहीं बनाया था।

इस बीच शिवसेना (UBT) सांसद संजय देशमुख की केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव से मुलाकात को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं तेज हुईं। हालांकि पार्टी नेता संजय राउत ने इसे लेकर सफाई दी और कहा कि सभी सांसद पार्टी के साथ हैं।

राउत ने बगावत की चर्चाओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि सांसदों को तोड़ने के लिए बड़ी रकम की पेशकश की जा रही है। उन्होंने सोशल मीडिया पर दावा किया कि प्रति सांसद 50 करोड़ रुपए तक की बात हो रही है।

गौरतलब है कि जून 2022 में शिवसेना में बड़ी टूट हुई थी, जब एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 40 विधायक अलग हो गए थे। इसके बाद उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री पद छोड़ना पड़ा था और शिंदे भाजपा के समर्थन से मुख्यमंत्री बने थे। बाद में चुनाव आयोग ने शिवसेना का चुनाव चिह्न ‘धनुष-बाण’ शिंदे गुट को दे दिया था। अब लोकसभा सांसदों के संभावित रुख को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।

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