मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी मौद्रिक नीति समीक्षा बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया है।
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शुक्रवार को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) के फैसलों की घोषणा करते हुए बताया कि रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है।
इस फैसले के बाद आम लोगों को राहत मिली है, क्योंकि होम लोन, वाहन लोन और अन्य कर्ज की ईएमआई में फिलहाल कोई बढ़ोतरी नहीं होगी।
आरबीआई ने इससे पहले दिसंबर 2025 में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की थी। वर्ष 2025 के दौरान केंद्रीय बैंक ने चार चरणों में कुल 1.25 प्रतिशत की कटौती कर ब्याज दरों को कम किया था।
अप्रैल 2026 की बैठक में भी रेपो रेट यथावत रखी गई थी।
हालांकि, आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए आर्थिक विकास दर (GDP Growth) के अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है।
केंद्रीय बैंक का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में रुकावटों का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
मौद्रिक नीति समिति ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा है। आरबीआई ने कहा कि महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक स्तर पर ईंधन और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी आगे चलकर दबाव पैदा कर सकती है।
साथ ही कमजोर मानसून की आशंका को भी चिंता का विषय बताया गया है, क्योंकि इसका असर कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग पर पड़ सकता है।
सकारात्मक पक्ष यह है कि देश का विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा क्षेत्र मजबूत बना हुआ है। रोजगार और शहरी खपत में स्थिरता के कारण अर्थव्यवस्था को समर्थन मिल रहा है।
ऐसे में रेपो रेट को स्थिर रखने का फैसला आर्थिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
