जगदलपुर। बस्तर जिले की ग्राम पंचायत पिपलावंड के आश्रित पारा जामगुड़ा में धर्मांतरण, वन भूमि पर कथित कब्जे और शासकीय कार्यों में बाधा को लेकर विवाद गहरा गया है। ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियां दर्ज कराते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के लगभग 65 परिवारों द्वारा ईसाई धर्म अपनाने के बाद एक अलग समूह का गठन कर लिया गया है, जो ग्राम पंचायत की पारंपरिक व्यवस्था, ग्राम प्रमुखों और सामुदायिक निर्णयों को स्वीकार नहीं कर रहा है। इससे गांव में सामाजिक और प्रशासनिक स्तर पर मतभेद की स्थिति बन रही है।
ग्रामीणों के अनुसार, शासकीय संसाधनों के उपयोग को लेकर भी विवाद उत्पन्न हो रहा है। आरोप है कि पानी टैंकर सहित अन्य सामुदायिक सुविधाओं पर कुछ लोगों द्वारा नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा लगभग 350 एकड़ वन भूमि पर कथित कब्जा कर खेती किए जाने की शिकायत भी ग्रामीणों ने की है।
विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष शंकर लाल गुप्ता का कहना है कि शासन द्वारा स्वीकृत तालाब निर्माण, पौधारोपण और जाली तार फेंसिंग जैसे विकास कार्यों का भी विरोध किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि 73 किसानों को भूमिहीन बताकर प्रशासन को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है, जबकि उनके पास व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र और राजस्व भूमि उपलब्ध है।
इन मुद्दों को लेकर आसपास के गांवों और पंचायतों की संयुक्त ग्रामसभा आयोजित की गई, जिसमें बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामसभा में कथित अवैध चर्च को हटाने की मांग उठाई गई तथा धर्मांतरण, वन भूमि और ग्राम पंचायत व्यवस्था से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की गई। इस दौरान कई प्रस्ताव भी पारित किए गए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और वन भूमि, शासकीय योजनाओं तथा ग्राम पंचायत की पारंपरिक व्यवस्था से जुड़े विवादों का समाधान किया जाए, ताकि क्षेत्र में सामाजिक सौहार्द और विकास कार्य सुचारु रूप से जारी रह सकें।
