छत्तीसगढ़ की बुधरी, डॉ. रामचंद्र–सुनीता को पद्मश्री

रायपुर। केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर वर्ष 2026 के लिए पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। इस सूची में छत्तीसगढ़ के लिए गर्व की खबर है। दंतेवाड़ा जिले की समाजसेवी बुधरी ताती और डॉक्टर दंपती डॉ. रामचंद्र गोडबोले व डॉ. सुनीता गोडबोले को पद्मश्री सम्मान देने की घोषणा की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने तीनों को बधाई देते हुए कहा कि यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सम्मान की बात है।
बस्तर की मिट्टी से जुड़ी बुधरी ताती पिछले करीब चार दशकों से समाजसेवा में सक्रिय हैं। दंतेवाड़ा के हिरानार गांव की रहने वाली बुधरी ताती ने महज 15 साल की उम्र में सामाजिक कार्यों की शुरुआत की थी। उन्होंने बस्तर संभाग के करीब 545 गांवों में पदयात्रा कर महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के लिए जागरूक किया। शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, वृद्ध और अनाथ आश्रम संचालन जैसे कार्यों के जरिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज को समर्पित कर दिया। समाजसेवा के लिए उन्हें अब तक 22 पुरस्कार मिल चुके हैं, जिनमें कई राष्ट्रीय स्तर के सम्मान भी शामिल हैं।
वहीं बस्तर में ‘डॉक्टर भैया’ और ‘भाभी’ के नाम से मशहूर डॉ. रामचंद्र गोडबोले और डॉ. सुनीता गोडबोले पिछले 35 वर्षों से आदिवासी अंचलों में नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। मूल रूप से महाराष्ट्र के सतारा के रहने वाले इस दंपती ने 1990 में दंतेवाड़ा के बारसूर को अपना कार्यक्षेत्र बनाया। अब तक वे 1 लाख से अधिक मरीजों का मुफ्त इलाज कर चुके हैं। कुपोषण और एनीमिया से बच्चों को बचाने के लिए MAAS योजना के तहत लगातार काम कर रहे हैं।
डॉ. रामचंद्र कहते हैं, “मेरे सामने बैठा हर आदिवासी मेरे लिए भगवान है।” पद्मश्री सम्मान के जरिए बस्तर में सेवा, समर्पण और मानवीय मूल्यों को राष्ट्रीय पहचान मिली है।





