सरकारी स्कूलों में योग शिक्षा पर सवाल: शिक्षक नहीं, लेकिन छप रही करोड़ों की किताबें

एनईपी 2020 के तहत योग अनिवार्य, लेकिन 56 हजार स्कूलों में एक भी नियमित योग शिक्षक नहीं

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत योग शिक्षा को अनिवार्य बनाने की दिशा में भले ही तेजी दिखाई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है।

राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) ने कक्षा तीसरी, चौथी और छठवीं के लिए योग की किताबें पहले ही तैयार कर दी हैं और अब पांचवीं, सातवीं और आठवीं कक्षाओं के लिए भी नई किताबों की प्रक्रिया जारी है।

हालांकि, सबसे बड़ी समस्या यह है कि प्रदेश के लगभग 56 हजार सरकारी स्कूलों में योग पढ़ाने के लिए एक भी नियमित योग शिक्षक की नियुक्ति नहीं की गई है। ऐसे में करोड़ों रुपये की किताबें होने के बावजूद उनका उपयोग सीमित होता जा रहा है।

छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम हर साल करीब 15 करोड़ रुपये के अतिरिक्त बजट से योग की किताबों का प्रकाशन कर रहा है। स्कूलों में हर शनिवार को आधे घंटे की योग कक्षा अनिवार्य करने का निर्णय भी लिया गया है।

लेकिन न तो इसके लिए पर्याप्त प्रशिक्षण है और न ही स्थायी शिक्षक। इसके विपरीत केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और निजी स्कूलों में योग शिक्षक मौजूद हैं, जिससे तुलना और भी सवाल खड़े करती है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति में योग को छात्रों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया गया है, लेकिन छत्तीसगढ़ में टाइम-टेबल में इसके लिए अलग पीरियड तक निर्धारित नहीं है। कई स्कूलों में योग की किताबें गोदामों में पड़ी हैं।

प्रदेश में योग आयोग की भूमिका भी सीमित मानी जा रही है, जबकि हजारों योग डिग्रीधारी युवाओं को रोजगार की उम्मीद अभी अधूरी है।

मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्य में योग को 100 अंकों के विषय के रूप में शामिल किया गया है, जबकि छत्तीसगढ़ में यह व्यवस्था अभी शुरुआती चरण में है।

शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने कहा है कि शनिवार को योग कक्षाएं अनिवार्य रहेंगी, वहीं योग आयोग के अध्यक्ष संजय अग्रवाल ने शिक्षकों को प्रशिक्षण देने की बात कही है।

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