दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में आयोजित ‘मेलबर्न मीट्स मोदी’ कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है।
कार्यक्रम के आयोजकों ने कांग्रेस के उन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि लोगों को पैसे देकर कार्यक्रम में बुलाया गया था।
आयोजकों ने इसे भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय का अपमान बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक माफी और बयान वापस लेने की मांग की है।
दरअसल, कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने 11 जुलाई को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया था कि 9 जुलाई को हुए कार्यक्रम में 25 से 30 हजार लोगों को पैसे देकर और चार्टर्ड विमानों के जरिए लाया गया।
कांग्रेस के अन्य नेताओं ने भी इसी तरह के आरोप लगाए और कहा कि प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए “भाड़े के एनआरआई” जुटाए गए।
इन आरोपों पर कार्यक्रम के आयोजकों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आयोजकों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सांसद राहुल गांधी को पत्र लिखकर कहा है कि कार्यक्रम पूरी तरह भारतीय-ऑस्ट्रेलियाई समुदाय के सहयोग से आयोजित किया गया था।
इसमें न तो भारतीय जनता पार्टी, न भारत सरकार और न ही ऑस्ट्रेलिया सरकार ने कोई आर्थिक सहायता दी। उन्होंने बताया कि चार्टर्ड फ्लाइट की व्यवस्था महीनों की योजना, स्वयंसेवकों की मेहनत और निजी सहयोग से की गई थी।
आयोजकों का कहना है कि हजारों प्रवासी भारतीयों ने अपने समय, संसाधन और व्यक्तिगत योगदान से इस आयोजन को सफल बनाया। ऐसे में उन्हें पैसे लेकर आए लोगों के रूप में पेश करना उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी और सम्मान को ठेस पहुंचाने जैसा है।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 और 10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर थे। मेलबर्न में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए ऑपरेशन सिंदूर, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर चर्चा की।
उनके संबोधन के दौरान बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने उत्साहपूर्वक उनका स्वागत किया।
