बस्तर के 200 से ज्यादा सुरक्षा कैंप बनेंगे सेवा डेरा: अमित शाह बोले- नक्सल हिंसा के पीड़ितों को सम्मानजनक जीवन देना हमारा संकल्प

रायपुर। नक्सलवाद से मुक्त बस्तर में अब हिंसा से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और विकास पर फोकस किया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि नक्सलवाद के कारण मिले घावों पर मरहम लगाकर पीड़ितों को सम्मानपूर्ण जीवन देना सरकार का संकल्प है। बस्तर के 200 से ज्यादा सुरक्षा कैंपों को ‘शहीद वीर गुंडाधुर सेवा डेरा’ के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां से ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं, रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की पहल होगी।

शाह बुधवार को दंतेवाड़ा में आयोजित दिव्यांगजन कृत्रिम अंग एवं सहायक उपकरण वितरण शिविर के दूसरे चरण के शुभारंभ कार्यक्रम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी कार्यक्रम में शामिल हुए। तीन दिवसीय शिविर 15 से 17 अक्टूबर तक चलेगा। इसमें दंतेवाड़ा के 509, बीजापुर के 197 और सुकमा के 62 सहित कुल 768 दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण दिए जाएंगे।

शाह ने कहा कि नक्सली हिंसा ने पांच दशकों तक बस्तर के आदिवासी और गरीब परिवारों को प्रभावित किया। आईईडी विस्फोटों में अंग गंवाने वाले लोगों को सहायता देकर आत्मनिर्भर बनाना जरूरी है। केंद्र सरकार इस काम में छत्तीसगढ़ सरकार के साथ खड़ी है।

8,526 आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास का दावा

शाह ने बताया कि करीब 8,526 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। इनमें 455 लोगों को नौकरी दी गई, 129 को जमीन आवंटित की गई और 2,308 लोगों को कौशल विकास का प्रशिक्षण मिला। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक, बस्तर पंडुम और नियद नेल्लानार जैसी योजनाओं से क्षेत्र में विकास को गति मिल रही है।

बस्तर को विकसित आदिवासी क्षेत्र बनाने का लक्ष्य

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि नक्सलवाद से मुक्ति के बाद बस्तर को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। नियद नेल्लानार के जरिए दूरस्थ गांवों तक सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। सेवा डेरों में स्थानीय संसाधनों पर आधारित प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियां संचालित की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य बस्तर के युवाओं और ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है।

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