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मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की तैयारी में विपक्ष, 200 सांसदों का समर्थन जुटाने की कवायद

दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने के लिए विपक्ष एक बार फिर सक्रिय हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, कई विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता आपसी चर्चा में जुटे हैं और एक नए नोटिस का मसौदा तैयार किया जा रहा है, ताकि हटाने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की जा सके।

इससे पहले मार्च में विपक्ष ने संसद में हटाने का प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन ओम बिरला और सी.पी. राधाकृष्णन ने नोटिस खारिज कर दिया था। उनका कहना था कि लगाए गए आरोप संवैधानिक मानकों के अनुरूप नहीं हैं, जो इस स्तर की कार्रवाई के लिए जरूरी होते हैं।

इस बार विपक्ष ज्यादा मजबूत रणनीति के साथ आगे बढ़ रहा है। नए प्रस्ताव के लिए कम से कम 200 सांसदों का समर्थन जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पीछे हाल ही में लोकसभा में गिरे 131वें संविधान संशोधन विधेयक की वोटिंग को आधार माना जा रहा है, जिसमें 230 सांसदों ने बिल के खिलाफ मतदान किया था।

नियमों के मुताबिक, लोकसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के प्रस्ताव के लिए कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं, जबकि राज्यसभा में यह संख्या 50 है। हालांकि केवल हस्ताक्षर पर्याप्त नहीं होते, प्रस्ताव को दोनों सदनों में पारित होना भी जरूरी है।

कानूनी प्रावधानों के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के जज के समान होती है। जजेज इन्क्वायरी एक्ट 1968 के तहत यदि दोनों सदनों में नोटिस स्वीकार हो जाता है, तभी जांच समिति गठित की जाती है। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई संभव होती है। विपक्ष की यह पहल आने वाले दिनों में संसद के भीतर राजनीतिक माहौल को और गर्मा सकती है।

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