5 हजार रुपए लेकर मुंबई आईं नोरा फतेही, ठगी, तानों और संघर्ष के बीच बनाई पहचान

मुंबई। आज बॉलीवुड की सबसे लोकप्रिय डांस परफॉर्मर्स में शुमार नोरा फतेही की सफलता के पीछे संघर्ष, असफलताओं और चुनौतियों की लंबी कहानी छिपी है। कनाडा से महज 5 हजार रुपए लेकर मुंबई पहुंचीं नोरा को शुरुआत में आर्थिक तंगी, भाषा की समस्या और ठगी जैसी कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

एक रूढ़िवादी परिवार में पली-बढ़ीं नोरा को बचपन से डांस का शौक था, लेकिन घर में इसका विरोध होता था। उन्होंने बिना किसी पेशेवर प्रशिक्षण के वीडियो देखकर डांस सीखा और अपने सपनों को पूरा करने के लिए भारत आने का फैसला किया। मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें हिंदी भाषा न आने के कारण कई बार रिजेक्शन झेलना पड़ा। ऑडिशन में उनके उच्चारण और एक्सेंट का मजाक भी उड़ाया जाता था।

नोरा ने बताया कि संघर्ष के दिनों में उन्हें गुजारा करने के लिए वेटर का काम करना पड़ा और लॉटरी टिकट भी बेचने पड़े। कई बार खाने के लिए पैसे नहीं होते थे और दिनभर सिर्फ ब्रेड और अंडों पर गुजारा करना पड़ता था। उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जिस एजेंसी के साथ वह शुरुआत में काम कर रही थीं, उसने उन्हें काम दिलाने का वादा कर करीब 20 लाख रुपए ठग लिए थे। यह रकम उन्होंने एक विज्ञापन से कमाई थी, लेकिन एजेंसी ने बाद में पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।

करियर की शुरुआत में उन्हें कई प्रोजेक्ट बिना भुगतान के करने पड़े। नोरा के अनुसार, ‘दिलबर’ जैसे सुपरहिट गाने समेत कई गानों में उन्होंने बिना फीस काम किया, क्योंकि उस समय उनका मकसद पहचान बनाना था। वर्ष 2018 में फिल्म सत्यमेव जयते के गीत दिलबर ने उनकी जिंदगी बदल दी और उन्हें देशभर में नई पहचान दिलाई।

इसके बाद ‘कमरिया’, ‘ओ साकी साकी’ और ‘गर्मी’ जैसे हिट गानों ने उन्हें स्टार बना दिया। नोरा का मानना है कि संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत ही उनकी सफलता की असली वजह है।

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