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रायपुर के स्कूलों में 9वीं-11वीं की परीक्षाओं को लेकर तनाव, अधूरे कोर्स और अचानक टाइम-टेबल

रायपुर। जिले के सरकारी स्कूलों में 9वीं और 11वीं कक्षा के छात्रों में अचानक जारी परीक्षा टाइम-टेबल को लेकर भारी तनाव देखा जा रहा है। शिक्षक पिछले दो-तीन महीने तक SIR (स्कूल इन्फॉर्मेशन रजिस्टर) में उलझे रहने के कारण कई स्कूलों में पाठ्यक्रम अब तक पूरा नहीं हो पाया है।

इसी बीच जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय ने 23 फरवरी को टाइम-टेबल जारी किया, जिसके अनुसार परीक्षाएं 27 फरवरी से शुरू होंगी। रायपुर जिले के 200 से अधिक हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों में लगभग 20 हजार छात्र 9वीं और 11वीं में अध्ययनरत हैं। अभिभावकों का कहना है कि पढ़ाई नियमित नहीं हो सकी और कई अहम विषयों के अध्याय अधूरे हैं।

विशेषकर 9वीं कक्षा को लेकर चिंता अधिक है, क्योंकि हर साल इस कक्षा में बड़ी संख्या में छात्र असफल हो जाते हैं। पैरेंट्स ने कहा कि सीमित समय में परीक्षा देने से छात्रों के परिणाम प्रभावित होंगे और इसका असर उनकी आगे की पढ़ाई पर पड़ेगा। उन्होंने समय सारिणी पर पुनर्विचार की मांग की है।

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षाएं 20 फरवरी से 18 मार्च तक आयोजित की जा रही हैं। बोर्ड परीक्षा के दौरान शिक्षक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन करते हैं, इसलिए 9वीं-11वीं की परीक्षाएं बोर्ड के बीच कराई जा रही हैं। डीईओ हिमांशु भारती ने बताया कि परीक्षा हर साल इसी अवधि में आयोजित होती है और स्कूलों को पहले ही सूचना दे दी गई थी।

शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार 8वीं के बाद 9वीं में आते ही पढ़ाई और परीक्षा का दबाव अचानक बढ़ जाता है। अधूरे सिलेबस और कम तैयारी के साथ परीक्षा देने से छात्रों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। इसके बावजूद, विभाग का तर्क है कि यदि परीक्षा बोर्ड के बाद कराई जाती तो कॉपियों की जांच में देरी होती। छात्र और अभिभावक दोनों ही जल्द समय सारिणी में संशोधन और उचित तैयारी का अवसर देने की मांग कर रहे हैं।

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