स्वास्थ्य विभाग में करोड़ों का PMU मॉडल: 33 विशेषज्ञों को लाखों का पैकेज, नियुक्तियों पर उठे सवाल

रायपुर। छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य विभाग में हाल के महीनों में लागू किए गए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (PMU) मॉडल को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
विभाग के विभिन्न संस्थानों में 33 विशेषज्ञों (कंसल्टेंट) की नियुक्ति की गई है, जिन्हें प्रतिमाह ढाई लाख से चार लाख रुपये तक का पैकेज दिया जा रहा है।
इन नियुक्तियों को लेकर विभाग के भीतर और बाहर चर्चा तेज हो गई है, क्योंकि यह वेतन कई वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों के वेतन से भी काफी अधिक बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय, चिकित्सा शिक्षा विभाग और छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कॉर्पोरेशन (CGMSC) में कुल 33 विशेषज्ञ तैनात किए गए हैं।
इनमें से 12 विशेषज्ञों की नियुक्ति पिछले वर्ष सितंबर में CGMSC में, दो विशेषज्ञों की नियुक्ति जनवरी में चिकित्सा शिक्षा विभाग में तथा 19 विशेषज्ञों की तैनाती हाल ही में स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय में की गई है। इन सभी की नियुक्ति एक निजी एजेंसी के माध्यम से की गई है।
विभागीय दस्तावेजों के अनुसार इन विशेषज्ञों का कार्य प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, आईटी सपोर्ट, सप्लाई चेन मैनेजमेंट, वित्तीय प्रबंधन, डेटा एनालिटिक्स, इंफ्रास्ट्रक्चर प्लानिंग और योजनाओं की मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
हालांकि विभाग के भीतर यह सवाल उठ रहा है कि ऐसे कई कार्य पहले से मौजूद शाखाओं और अधिकारियों द्वारा किए जा रहे हैं, फिर अलग से उच्च वेतन पर विशेषज्ञों की आवश्यकता क्यों पड़ी।
पड़ताल में यह भी सामने आया है कि कुछ नियुक्तियों की योग्यता और अनुभव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। विभागीय सूत्रों का दावा है कि कुछ पदों पर निर्धारित पात्रता से कम अनुभव वाले लोगों की नियुक्ति की गई है।
वहीं CGMSC में नियुक्त तीन विशेषज्ञ कुछ समय बाद नौकरी छोड़ चुके हैं।
विशेषज्ञों की जवाबदेही और कार्य मूल्यांकन को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था नहीं होने की चर्चा है। ऐसे में करोड़ों रुपये की लागत वाली इस व्यवस्था की पारदर्शिता, प्रभावशीलता और आवश्यकता को लेकर स्वास्थ्य विभाग में बहस तेज हो गई है।





