दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार रात फ्रांस के नीस शहर पहुंचे। होटल पहुंचने पर वहां मौजूद भारतीय समुदाय के लोगों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने बच्चों से मुलाकात की और एक बच्चे को गोद में लेकर दुलार किया। भारतीय समुदाय की महिलाओं ने प्रधानमंत्री का हाथ अपने माथे से लगाकर सम्मान व्यक्त किया। स्वागत कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री ने सांस्कृतिक कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया।
प्रधानमंत्री मोदी आज फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने पर चर्चा होगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे। बैठक के दौरान तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, स्वास्थ्य तकनीक, मेडिकल टेक्नोलॉजी और अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े करीब 12 समझौतों पर बातचीत होने की संभावना है।
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग भी इस यात्रा का प्रमुख मुद्दा रहेगा। दोनों देशों के बीच 114 राफेल लड़ाकू विमानों की संभावित डील पर चर्चा होगी। भारत चाहता है कि नए विमानों में स्वदेशी हथियारों के इस्तेमाल की सुविधा मिले। इसके लिए तकनीकी जानकारी और सोर्स कोड से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत हो सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी 13 से 18 जून तक फ्रांस और स्लोवाकिया के दौरे पर हैं। इस दौरान वे नीस, एवियान और पेरिस जाएंगे। फ्रांस यात्रा के बाद वे स्लोवाकिया पहुंचेंगे, जहां वहां के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रिनी से मुलाकात करेंगे। यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री का स्लोवाकिया का पहला दौरा होगा।
प्रधानमंत्री फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। इस दौरान वैश्विक सुरक्षा, आर्थिक सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, यूक्रेन युद्ध, मध्य-पूर्व संकट और ऊर्जा सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।
भारत जी-7 का सदस्य नहीं है, लेकिन दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्था और वैश्विक मंचों पर बढ़ती भूमिका के कारण उसे विशेष आमंत्रित देश के रूप में शामिल किया जाता है। प्रधानमंत्री मोदी इससे पहले भी कई बार जी-7 बैठकों में हिस्सा ले चुके हैं।
भारत और फ्रांस के रिश्ते लंबे समय से मजबूत रणनीतिक साझेदारी पर आधारित हैं। रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और वैश्विक मंचों पर दोनों देश एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं। प्रधानमंत्री की यह यात्रा दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।
