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Marwahi by-election: क्या मरवाही सीट पर जोगी परिवार की प्रतिष्ठा रहेगी कायम? या बीजेपी और कांग्रेस छीन लेंगी उनसे उनका गढ़….

दीक्षा मिश्रा

छत्तीसगढ़ (Marwahi by-election) के सबसे हाईप्रोफाइल सीट मरवाही में 3 नवंबर को उपचुनाव होने वाले हैं। पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के निधन के बाद से मरवाही सीट खाली है। अनुसूचित जनजाति के इस मरवाही विधानसभा सीट पर कई सालों से जोगी परिवार का कब्जा रहा है। मगर इस बार अमित जोगी की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। क्यों कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार है, और मुखिया भूपेश बघेल हैं, ऐसे में ये सीट कांग्रेस के लिए काफी अहम है, जिस पर जीत हासिल करने के लिए कांग्रेस ने पूरा जोर लगा दिया है। इधर कांग्रेस को इस सीट पर खुद की पार्टी का विरोध भी झेलना पड़ रहा है। वहां के लोकल कार्यकर्ताओं ने बाहरी को प्रत्याशी बनाने से नाराज है। (Marwahi by-election)हालांकि कांग्रेस के बड़े नेता आश्वसत है कि नाराजगी को दूर कर लेंगे। उपचुनाव को लेकर बीजेपी भी मैदान में उतर चुकी है। कांग्रेस और जोगी कांग्रेस को कांटे की टक्कर दे रही है। प्रदेश के कई बड़े नेताओं का मरवाही दौरा शुरू हो चुका है। मरवाही विधानसभी सीट पर 3 नवंबर को उपचुनाव है. 10 नवंबर को नतीजे आएंगे।

(Marwahi by-election)इस बार जोगी परिवार के गढ़ में सेंध लगाने में कांग्रेस और बीजेपी कोई कसर नहीं छोड़ रही है. कांग्रेस और बीजेपी दोनों पार्टियों ने इस बार किसी नेता पर दांव ना खेलकर डॉक्टरों को मैदान में उतारा है। कांग्रेस की ओर से ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ केके ध्रुव को प्रत्याशी बनाया गया है, तो बीजेपी ने सर्जन डॉ गंभीर सिंह को प्रत्याशी चुना है। जोगी कांग्रेस से अमित जोगी ने खुद इस सीट पर दावेदारी ठोकी है। बीजेपी 15 अक्टूबर को नामांकन भरेंगे। इधर कांग्रेस और जोगी कांग्रेस 16 अक्टूबर को नामांकन दाखिल करेंगे।

अजीत जोगी ने 2003, 2008 और 2018 में इस सीट से चुनाव लड़ा है, और जीत भी हासिल की। यहां जीत और हार के गणितीय समीकरण को समझे तो बीजेपी को अजीत जोगी ने कड़ी शिकस्त दी है।

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2003 की चुनाव की बात करें तो अजीत जोगी को 76,269 वोट मिल थे। जबकि बीजेपी के नंदकुमार साय को  22119 वोट मिले। अजीत जोगी ने 541500 मत से जीत हासिल किया था।

वहीं 2008 में जोगी और बीजेपी के ध्यान सिंह के बीच टक्कर थी। लेकिन अजीत जोगी ने 42 हजार वोटों से जीत हासिल किए। इस चुनाव में जोगी को 67522 और बीजेपी को 25431 मत हासिल हुए थे।

इधर 2013 में अजीत जोगी खुद चुनाव ना लड़कर अपने बेटे अमित जोगी को मैदान में उतारा। इस बार भी अमित जोगी ने समीरा पैकरा को हराकर जीत हासिल की। 2013 के चुनाव में अमित जोगी को 82909 और समीरा पैकरा को 36659 मत हासिल हुए थे। 46250 मतों के साथ अमित जोगी को जीते थे।

2018 में खुद अजित जोगी ने चुनाव लड़ा  45395 वोटों के साथ अजीत जोगी ने जीत हासिल की।

बहरहाल अब लड़ाई दो पार्टियों के बीच ना होकर त्रिकोणीय हो चुका है। बीजेपी और कांग्रेस के लिए यह प्रतिष्ठा का पद बन चुका है। जिसको लेकर दोनो पार्टियों ने पूरा दमखम लगा दिया है। जोगी के गढ़ में कांग्रेस ने 5 मंत्रियों और 50 विधायकों को जिम्मेदारी सौप दी है। बीजेपी प्रदेश के कई बड़े नेताओं का चुनावी दौरा शुरू हो चुका है। इधर अजीत जोगी और कोटा विधायक डॉ रेणु जोगी भी लोगों से जनसंपर्क शुरू कर चुके हैं। लेकिन अब देखने वाली बात होगी कांग्रेस, बीजेपी और जोगी कांग्रेस की इस चुनावी लड़ाई में किसके सिर सजेगा जीत का सहरा

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