नारायणपुर के तुमेरादी गांव में 45 वर्षीय सन्नो बाई का मुफ्त इलाज शुरू, समय पर पहचान से हाथ को स्थायी विकलांगता से बचाया
नारायणपुर। बस्तर के दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाना आज भी चुनौती है। कहीं घने जंगल तो कहीं नदी-नाले और ऊंची पहाड़ियां रास्ता रोकती हैं।
इन मुश्किलों के बीच स्वास्थ्य विभाग की टीम नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड के तुमेरादी गांव पहुंची। यहां 45 वर्षीय सन्नो बाई लंबे समय से कुष्ठ रोग से पीड़ित थीं। समय पर इलाज नहीं मिलने से उनके हाथ की उंगलियां प्रभावित होने लगी थीं। स्वास्थ्य शिविर में बीमारी की पहचान के बाद अब उनका मुफ्त इलाज शुरू हो गया है।
20 किमी दूर गांव पहुंचने के लिए सात बार पार की नदी
तुमेरादी गांव उप स्वास्थ्य केंद्र मड़पुर से करीब 20 किलोमीटर दूर है। चारों तरफ जंगल, पहाड़ और नदी-नालों से घिरे इस गांव तक पहुंचने के लिए स्वास्थ्य टीम को एक ही नदी सात बार पार करनी पड़ी। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत टीम ने दुर्गम रास्तों की परवाह किए बिना गांव में स्वास्थ्य शिविर लगाया और ग्रामीणों की जांच की।
जिला अस्पताल में शुरू हुआ इलाज
शिविर में सन्नो बाई की जांच के दौरान कुष्ठ रोग का पता चला। जानकारी की कमी, आर्थिक तंगी और गांव की दुर्गम स्थिति के कारण वह अब तक इलाज नहीं करा सकी थीं। बीमारी की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य टीम ने उन्हें जिला अस्पताल नारायणपुर पहुंचाया। यहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद कुष्ठ रोग की पुष्टि की और तत्काल एमडीटी दवाएं देकर नियमित उपचार शुरू किया।
सन्नो बाई और उनके परिवार को दवाओं के नियमित सेवन, सावधानियों और बीमारी से बचाव की जानकारी भी दी गई। समय पर पहचान और इलाज शुरू होने से उनके हाथ को स्थायी विकलांगता से बचाने में मदद मिली। फिलहाल उनका उपचार जारी है और स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है।
‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ का उद्देश्य दूरस्थ और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है। सन्नो बाई का मामला बताता है कि समय पर जांच और उपचार से गंभीर बीमारी के असर को कम किया जा सकता है।
