उग्रवाद की खामोशी से विकास की गूंज तक,ककनार घाटी में बदली बस्तर की तस्वीर

रायपुर। बस्तर की दुर्गम ककनार घाटी, जो कभी वामपंथी उग्रवाद के साय और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विकास की दौड़ में पिछड़ गई थी, आज एक नए सवेरे की गवाह बन रही है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ‘मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा योजना’ ने इस इलाके की तकदीर बदल दी है। वर्षों से अलग-थलग पड़े कुधूर, धरमाबेड़ा, चंदेला, ककनार और पालम जैसे गांव अब विकास की मुख्यधारा से सीधे जुड़ चुके हैं।
भय के सन्नाटे को चीरती विकास की बस
4 अक्टूबर 2025 को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय द्वारा शुरू की गई यह बस सेवा महज एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक है।
जिन रास्तों पर कभी पगडंडियों के सिवा कुछ न था, वहां आज बसों की आवाजाही ने शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए द्वार खोल दिए हैं। योजना के छह माह पूरे होने पर मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा, “यह परिवर्तन हमारे समावेशी विकास और मजबूत बुनियादी ढांचे के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।”
मर्दापाल से जगदलपुर तक सुलभ हुआ सफर
यह बस सेवा कोंडागांव जिले के मर्दापाल से शुरू होकर घाटी के चुनौतीपूर्ण मार्गों से गुजरते हुए धरमाबेड़ा और ककनार जैसे गांवों को जगदलपुर से जोड़ती है। दशकों तक परिवहन के लिए तरसने वाले ग्रामीणों के लिए अब तहसील मुख्यालय या जिला अस्पताल पहुंचना आसान हो गया है। सड़कों के जाल ने न केवल दूरी कम की है, बल्कि शासन और जनता के बीच के भरोसे को भी मजबूत किया है।
साप्ताहिक बाजारों में लौटी रौनक
स्थानीय जनप्रतिनिधियों के अनुसार, पहले माओवादी प्रभाव के कारण विकास कार्य पूरी तरह ठप थे। चंदेला के सरपंच तुलाराम नाग और ककनार के सरपंच बलीराम बघेल बताते हैं कि अब सालभर संपर्क सुनिश्चित होने से शासकीय योजनाओं का लाभ घर-घर पहुंच रहा है। ककनार के साप्ताहिक हाट-बाजारों में बढ़ती भीड़ और वहां का उत्साह इस जमीनी बदलाव की जीवंत तस्वीर पेश करता है।





