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सिलाई से मुर्गी पालन तक, रानू ने खड़ी की कमाई की कई राहें: सालाना 3 लाख तक आय

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योजनाओं का असर अब गांवों में दिखाई देने लगा है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के मरवाही विकासखंड की ग्राम पंचायत अंडी की रानू कैवर्त ने अपने हुनर और मेहनत से ऐसी ही मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ने के बाद उन्होंने एक काम पर निर्भर रहने के बजाय कई आजीविका गतिविधियां शुरू कीं। इससे उनकी वार्षिक आय बढ़कर करीब 2 से 3 लाख रुपए तक पहुंच गई है।

एक साथ कई कामों से बढ़ी आमदनी

रानू कैवर्त शिव गुरु महिला स्व-सहायता समूह की सचिव हैं। समूह के मार्गदर्शन और आर्थिक सहयोग से उन्होंने सिलाई कार्य, कपड़ों की दुकान और किराना स्टोर जैसी गतिविधियों को आगे बढ़ाया। इसके साथ ही बटेर पालन, देशी मुर्गी पालन और हैचरी का काम भी शुरू किया।

सिलाई और कपड़ों की दुकान से उन्होंने अपने हुनर को कमाई में बदला। वहीं किराना दुकान और पशु-पक्षी पालन से आय के अतिरिक्त स्रोत तैयार हुए। अलग-अलग गतिविधियों को एक साथ चलाने से उन्हें स्थानीय बाजार और उपलब्ध संसाधनों का फायदा मिला।

बिहान से मिला प्रशिक्षण और सहयोग

रानू के मुताबिक, स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आर्थिक सहायता के साथ प्रशिक्षण और मार्गदर्शन मिला। समूह की सामूहिक शक्ति ने उनका आत्मविश्वास बढ़ाया। उन्होंने मिले अवसर को मेहनत के साथ जोड़ा और धीरे-धीरे अपनी आजीविका के कई साधन विकसित किए।

उनकी सफलता अब गांव की दूसरी महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बनी है। रानू का मानना है कि महिलाओं को सही प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर मिले तो वे परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ खुद भी आत्मनिर्भर बन सकती हैं।

महतारी वंदन योजना से भी मिला संबल

रानू कैवर्त को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता से घरेलू जरूरतें पूरी करने में मदद मिलती है। इससे उन्हें अपनी आजीविका गतिविधियों पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिल रहा है।

रानू ने अपनी सफलता के लिए राज्य सरकार और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। उनकी कहानी ‘लखपति दीदी’ बनने की दिशा में आगे बढ़ रही ग्रामीण महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और उद्यमशीलता का उदाहरण है।

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