टाटा ट्रस्ट्स में विवाद: वेणु श्रीनिवासन का इस्तीफा, मिस्त्री ने नियुक्ति पर उठाए सवाल

नई दिल्ली । टाटा ट्रस्ट्स के भीतर चल रहे विवाद के बीच बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। वेणु श्रीनिवासन ने ‘बाई हीराबाई चैरिटेबल ट्रस्ट’ के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इसके पीछे अपनी व्यावसायिक व्यस्तताओं को कारण बताया है, लेकिन इस्तीफे के समय ने कॉर्पोरेट जगत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
यह इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब एक दिन पहले ही टाटा समूह के पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने ट्रस्ट के बोर्ड में नियुक्तियों को चुनौती दी थी। मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास याचिका दायर कर दावा किया है कि बोर्ड के कुछ सदस्य ट्रस्ट डीड की पात्रता शर्तों को पूरा नहीं करते।
मिस्त्री ने विशेष रूप से वेणु श्रीनिवासन और सह-ट्रस्टी विजय सिंह की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ट्रस्ट डीड के अनुसार ट्रस्टी बनने के लिए दो प्रमुख शर्तें अनिवार्य हैं—ट्रस्टी का पारसी जोरोस्ट्रियन होना और बॉम्बे प्रेसीडेंसी-नवसारी क्षेत्र का स्थायी निवासी होना। मिस्त्री का आरोप है कि ये दोनों ही शर्तें संबंधित सदस्यों द्वारा पूरी नहीं की गई हैं।
मिस्त्री ने यह भी कहा कि यदि नियुक्ति ही नियमों के खिलाफ है, तो ऐसे ट्रस्टियों द्वारा लिए गए फैसले भी कानूनी रूप से वैध नहीं माने जा सकते। गौरतलब है कि मिस्त्री का खुद का कार्यकाल 2025 में रिन्यू नहीं किया गया था, जिसे उन्होंने चुनौती दी है।
रतन टाटा के करीबी माने जाने वाले वेणु श्रीनिवासन लंबे समय से टाटा समूह के ट्रस्टों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। ऐसे में उनका इस्तीफा इस विवाद को और गहरा कर सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह मामला अब कानूनी और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर अहम मोड़ ले सकता है, जिसका असर टाटा ट्रस्ट्स की कार्यप्रणाली और गवर्नेंस पर पड़ना तय है।





