रायगढ़ में हाथी शावकों की मौत का खुलासा: हेपेटाइटिस और सेप्टिसीमिया बने वजह, 24 दिन में 4 शावकों ने तोड़ा दम

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडल में पिछले 24 दिनों के भीतर चार हाथी शावकों की मौत के मामले में जांच रिपोर्ट से अहम खुलासा हुआ है। देहरादून और बरेली की प्रयोगशालाओं से आई रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि एक शावक की मौत हेपेटाइटिस (यकृत संक्रमण) और दूसरे की मौत सेप्टिसीमिया (गंभीर रक्त संक्रमण) के कारण हुई। इससे पहले एक अन्य शावक की मौत निमोनिया से होने की पुष्टि हो चुकी है।

वन विभाग के अनुसार 8 मई से 1 जून के बीच एक ही हाथी दल के चार शावकों की मौत हुई थी। लगातार हो रही मौतों ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी थी। पोस्टमॉर्टम के बाद वैज्ञानिकों की निगरानी में सैंपल एकत्र कर जांच के लिए देहरादून और बरेली की लैब भेजे गए थे। अब रिपोर्ट आने के बाद मौतों के पीछे संक्रमण की वजह सामने आई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक हेपेटाइटिस लिवर को प्रभावित करने वाला संक्रमण है, जबकि सेप्टिसीमिया में रक्त संक्रमित हो जाता है, जिससे जान का खतरा बढ़ जाता है। लगातार सामने आ रहे मामलों को देखते हुए वन विभाग ने हाथी शावकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य निगरानी को और मजबूत कर दिया है।

इसी बीच हाथियों की मौत के कारणों और बचाव के उपायों पर रायगढ़ में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें विभिन्न राज्यों से आए वैज्ञानिकों और वन्यजीव विशेषज्ञों ने हाथियों में होने वाली बीमारियों, संक्रमण की पहचान और संरक्षण उपायों पर जानकारी साझा की।

वर्तमान में रायगढ़ और धरमजयगढ़ वन मंडलों के जंगलों में 137 हाथी मौजूद हैं, जिनमें 35 शावक भी शामिल हैं। वन विभाग ने ट्रैकर्स, हाथी मित्र दल, ट्रैप कैमरों और थर्मल ड्रोन की मदद से निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जा रही है, ताकि हाथी शावकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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