राशन से सरिता के परिवार का खर्च घटा, मजदूरी की कमाई में बचत

चावल, चना और शक्कर नियमित मिलने से छह सदस्यीय परिवार को राहत, दूसरी जरूरतों के लिए बच रही राशि

रायपुर। सीमित आमदनी वाले परिवारों के लिए रोजमर्रा के राशन का खर्च घरेलू बजट पर बड़ा असर डालता है। सरगुजा जिले के ग्राम सकालो चारपारा निवासी सरिता पात्र के छह सदस्यीय परिवार की स्थिति भी ऐसी ही थी। परिवार मजदूरी कर आजीविका चलाता है और पहले कमाई का बड़ा हिस्सा चावल, तेल, नमक, शक्कर सहित खाद्य सामग्री खरीदने में खर्च हो जाता था। अब खाद्यान्न सहायता के तहत नियमित राशन मिलने से परिवार के भोजन की जरूरत पूरी हो रही है और मजदूरी की कमाई में कुछ राशि बचने लगी है।

चावल, चना और शक्कर मिलने से कम हुआ खर्च

सेवा संकल्प अभियान के तहत अपनी ‘सेवा की कहानी’ साझा करते हुए सरिता ने बताया कि राशन दुकान से परिवार को चावल, चना और शक्कर मिल रही है। इससे नियमित खाद्यान्न जरूरतों को पूरा करने में मदद मिल रही है। राशन खरीदने पर होने वाला खर्च कम होने से घरेलू बजट को भी राहत मिली है।

सरिता के मुताबिक पहले मजदूरी से मिलने वाली सीमित राशि में से ही परिवार के लिए राशन खरीदना पड़ता था। भोजन की सामग्री खरीदने के बाद दूसरी जरूरतों के लिए पैसे बचाना मुश्किल हो जाता था। अब कुछ जरूरी खाद्य सामग्री राशन के माध्यम से मिलने से मजदूरी की कमाई का हिस्सा अन्य जरूरतों के लिए बच पा रहा है।

छह सदस्यीय परिवार को मिला घरेलू बजट में सहारा

सरिता ने बताया कि पहले मजदूरी की कमाई चावल, तेल, नमक और शक्कर जैसी सामग्री खरीदने में खर्च हो जाती थी। अब चावल, चना और शक्कर मिलने से खर्च में कमी आई है। बची राशि से परिवार की अन्य रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में मदद मिल रही है।

उन्होंने खाद्यान्न सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया। सरिता का कहना है कि नियमित राशन मिलने से मजदूरी करने वाले परिवारों को भोजन की चिंता कम हुई है और सीमित आय में बचत की गुंजाइश बनी है। उनकी कहानी बताती है कि खाद्यान्न सहायता परिवार के भोजन के साथ घरेलू बजट को भी सहारा दे रही है।

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