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लाल आतंक के अंत की उलटी गिनती,31 मार्च को देश होगा माओवाद मुक्त

रायपुर। लाल आतंक के अंत की उलटी गिनती अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। भारत के आंतरिक सुरक्षा इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है, क्योंकि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा निर्धारित 31 मार्च 2026 की समयसीमा अब बेहद करीब है। देश से माओवादी हिंसा के समूल उन्मूलन के लिए शुरू की गई इस मुहिम में अब महज 31 दिन शेष हैं, और पूरे देश की निगाहें इस ऐतिहासिक लक्ष्य की ओर टिकी हुई हैं।

पिछले दो वर्षों में सुरक्षा बलों ने जिस दृढ़ संकल्प, रणनीतिक कौशल और साहस के साथ अभियान को अंजाम दिया है, उसके परिणाम बेहद उत्साहजनक और प्रेरणादायक रहे हैं। इस अवधि में 487 माओवादी मारे गए, 1853 को गिरफ्तार किया गया और 2336 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना। यह सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में चल रही प्रभावी रणनीति का परिणाम है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने इसे सुरक्षा बलों की अदम्य इच्छाशक्ति और जुझारूपन की जीत बताया है।

माओवादी संगठन के लिए बीते दस महीने सबसे ज्यादा घातक सिद्ध हुए हैं। संगठन के प्रमुख नेता थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी का आत्मसमर्पण उनके लिए करारा झटका माना जा रहा है। इससे पहले मई 2025 में महासचिव बसव राजू का खात्मा और अक्टूबर 2025 में सीआरबी प्रमुख भूपति का समर्पण संगठन की कमर तोड़ चुका था। अब देवजी के आत्मसमर्पण से छत्तीसगढ़, तेलंगाना और ओडिशा में माओवादी नेतृत्व का ढांचा लगभग पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।

हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बंदूक की लड़ाई लगभग अंतिम चरण में है, लेकिन वैचारिक संघर्ष अभी बाकी है। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के अनुसार अब प्राथमिकता लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रसार और अर्बन नक्सलियों को मुख्यधारा से जोड़ने की होगी, ताकि हिंसा के रास्ते को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

बस्तर से लेकर दिल्ली तक, अब देश को बस 31 मार्च का इंतजार है, जब दशकों पुराने लाल आतंक से मुक्ति की आधिकारिक घोषणा होगी।

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