लिंगराज मंदिर में सीएम साय ने की पूजा, प्रदेश की खुशहाली की कामना

सपत्नीक भगवान लिंगराज के दर्शन किए; बोले- प्राचीन मंदिर सनातन संस्कृति और स्थापत्य कला के जीवंत प्रतीक
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को भुवनेश्वर प्रवास के दौरान प्रसिद्ध भगवान लिंगराज मंदिर पहुंचकर सपत्नीक दर्शन-पूजन किया। उन्होंने विधि-विधान से भगवान लिंगराज की पूजा-अर्चना की और छत्तीसगढ़ के नागरिकों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की।
पूजा के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान लिंगराज के दर्शन और उनकी पावन भूमि पर आने का अवसर उनके लिए सौभाग्य की बात है। मंदिर परिसर का आध्यात्मिक वातावरण मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। उन्होंने भगवान लिंगराज से छत्तीसगढ़ की निरंतर प्रगति और प्रदेश के प्रत्येक परिवार के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
प्राचीन मंदिर संस्कृति के जीवंत प्रतीक
मुख्यमंत्री साय ने लिंगराज मंदिर की भव्य स्थापत्य कला की सराहना करते हुए कहा कि भारत के प्राचीन मंदिर केवल धार्मिक आस्था के केंद्र नहीं हैं। ये देश की हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता, संस्कृति, परंपरा और शिल्प कौशल के जीवंत प्रतीक हैं। लिंगराज मंदिर की भव्यता और उत्कृष्ट वास्तुकला भारतीय सांस्कृतिक विरासत की समृद्ध परंपरा को दर्शाती है।
उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की यात्रा से देश की सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिलता है। मंदिर की स्थापत्य शैली और धार्मिक परंपराएं भारतीय संस्कृति की विविधता और उसकी निरंतरता को प्रदर्शित करती हैं।
छत्तीसगढ़-ओडिशा के सांस्कृतिक संबंध
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ और ओडिशा भौगोलिक रूप से पड़ोसी राज्य हैं और दोनों के बीच पुराने सांस्कृतिक व आध्यात्मिक संबंध हैं। दोनों राज्यों की लोक परंपराओं, आस्था और सांस्कृतिक विरासत में कई समानताएं देखने को मिलती हैं।
उन्होंने कहा कि इस तरह की यात्राएं दोनों राज्यों के बीच साझा सांस्कृतिक चेतना और आत्मीय संबंधों को और मजबूत करती हैं। मुख्यमंत्री के मंदिर पहुंचने के दौरान स्थानीय परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना की गई और मंदिर की धार्मिक एवं ऐतिहासिक विशेषताओं की जानकारी भी ली गई।





