राज्यसभा में पेश होगा ‘CAPF विधेयक 2026’: भर्ती और सेवा नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी

दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज राज्यसभा में ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक, 2026’ पेश करने जा रहे हैं।

10 लाख से अधिक जवानों वाले इन बलों के लिए यह एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य CRPF, BSF, CISF, ITBP और SSB जैसे विभिन्न अर्धसैनिक बलों के भर्ती, पदोन्नति और प्रतिनियुक्ति नियमों में एकरूपता लाना है।

विधेयक के मुख्य बिंदु और उद्देश्य
वर्तमान में सभी अर्धसैनिक बल अपने-अपने अलग कानूनों के तहत संचालित होते हैं, जिससे प्रशासनिक विसंगतियां पैदा होती हैं। इस बिल के माध्यम से सरकार एक एकीकृत नियम (Unified Rules) लागू करना चाहती है।

नेतृत्व में स्थिरता: इस बिल का प्राथमिक लक्ष्य नेतृत्व संरचना को सुव्यवस्थित करना और प्रशासनिक प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाना है।

IPS प्रतिनियुक्ति को वैधानिक दर्जा: नए नियमों के तहत शीर्ष पदों पर भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारियों की तैनाती को कानूनी मान्यता मिलेगी। इसके तहत IG के 50% और ADG के 67% पद IPS अधिकारियों के लिए आरक्षित रखे जाएंगे।

कैडर अधिकारियों के अवसर: बिल में कैडर अधिकारियों के लिए पदोन्नति के नए रास्ते खोलने का भी प्रावधान है।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला और विवाद
यह विधेयक मई 2025 में आए सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की पृष्ठभूमि में लाया जा रहा है, जिसमें IPS अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को धीरे-धीरे कम करने की बात कही गई थी। हालांकि, सरकार का तर्क है कि IPS अधिकारियों की उपस्थिति से केंद्र और राज्यों के बीच आंतरिक सुरक्षा को लेकर बेहतर समन्वय बना रहता है।

दूसरी ओर, अर्धसैनिक बलों के रिटायर्ड अधिकारियों के संगठन इस विधेयक का विरोध कर रहे हैं। उनका आरोप है कि यह कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन है। सेवानिवृत्त अधिकारियों के एक समूह ने इस संबंध में गृह सचिव के खिलाफ अवमानना याचिका भी दायर की है और मांग की है कि इस बिल को विस्तृत चर्चा के लिए संसदीय समिति के पास भेजा जाए।

यह बिल न केवल बलों के प्रशासन को प्रभावित करेगा, बल्कि देश की आंतरिक और सीमा सुरक्षा की भावी रणनीति को भी नई दिशा देगा।

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