रायपुर। रायपुर-विशाखापत्तनम कॉरिडोर के भूमि अधिग्रहण में सामने आए भारतमाला मुआवजा घोटाले ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच में पता चला है कि बड़े भूखंडों को भाई-भतीजों, बहू-बेटियों और अन्य परिजनों के नाम पर छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर करोड़ों रुपये का मुआवजा लिया गया। यह “जमीन बंटवारा मॉडल” अब जांच एजेंसियों के लिए एक बड़ा उदाहरण बन गया है।
जांच के दौरान यह सामने आया कि एक ही खसरे को कई हिस्सों में विभाजित कर अलग-अलग नामों से नामांतरण कराया गया। इसके बाद हर हिस्से पर अलग-अलग मुआवजा लिया गया। उदाहरण के तौर पर खसरा नंबर 1265 को सात हिस्सों में, 2026 को 17, 2023 को 11 और 2033 को 10 हिस्सों में बांटकर भुगतान लिया गया। इससे स्पष्ट होता है कि एक ही जमीन को कई मालिक दिखाकर बार-बार मुआवजा हासिल किया गया।
ईओडब्ल्यू की जांच में यह भी खुलासा हुआ कि दस्तावेजों में हेरफेर कर सरकारी जमीन को भी निजी बताकर मुआवजा लिया गया। कई मामलों में खसरों को 30 से 60 हिस्सों तक में बांट दिया गया, जिससे मुआवजे की राशि कई गुना बढ़ गई। अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।
जांच में अन्य परिवारों की संलिप्तता भी सामने आई है। अभनपुर क्षेत्र में गुप्ता परिवार के 26 मामलों में करीब 13 करोड़ रुपये का मुआवजा लिया गया। वहीं अग्रवाल-सिंघल नेटवर्क ने खसरों को 10 से 32 हिस्सों में बांटकर लाभ उठाया। ग्राम कोलर में गोलछा परिवार ने एक खसरे को 67 हिस्सों में बांटकर 20 करोड़ से अधिक का मुआवजा हासिल किया।
एजेंसियां अब हर खसरे की बारीकी से जांच कर रही हैं, ताकि इस सुनियोजित घोटाले में शामिल लोगों और मिलीभगत की पूरी सच्चाई सामने लाई जा सके।
