चुनावी हलफनामे में गलत जानकारी पर कोई भी कर सकता है शिकायत: सुप्रीम कोर्ट

दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने या महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने वाले उम्मीदवारों को लेकर अहम टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों में आम नागरिक भी निर्वाचित उम्मीदवारों के खिलाफ जन प्रतिनिधित्व अधिनियम (Representation of the People Act) के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 195 के तहत लगाई गई पाबंदियां ऐसे मामलों में शिकायत दर्ज कराने के रास्ते में बाधा नहीं बनेंगी। इस टिप्पणी का संबंध उन मामलों से है, जिनमें उम्मीदवार चुनाव के दौरान दाखिल हलफनामे में गलत जानकारी देते हैं या जरूरी तथ्यों को छिपाते हैं।
गलत जानकारी और तथ्य छिपाने पर कार्रवाई का रास्ता
चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों को अपने हलफनामे में निर्धारित जानकारियां देनी होती हैं। इनमें संपत्ति, देनदारियों और अन्य जरूरी विवरणों से संबंधित जानकारी शामिल हो सकती है। इन जानकारियों का उद्देश्य मतदाताओं को उम्मीदवार की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है, ताकि वे सोच-समझकर अपना प्रतिनिधि चुन सकें।
यदि कोई उम्मीदवार हलफनामे में गलत जानकारी देता है या महत्वपूर्ण तथ्य छिपाता है, तो इससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के अनुसार, ऐसे मामलों में शिकायत करने का अधिकार केवल किसी विशेष सरकारी प्राधिकारी तक सीमित नहीं है।
CrPC की धारा 195 पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने कहा कि CrPC की धारा 195 के तहत मौजूद प्रतिबंधों को इस तरह नहीं पढ़ा जाना चाहिए कि चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने के मामलों में आम नागरिकों की शिकायत का रास्ता ही बंद हो जाए। ऐसे मामलों में जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी से चुनावी हलफनामों में दी जाने वाली जानकारी की सत्यता और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता का मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है। हालांकि, शिकायत दर्ज होने का अर्थ अपने आप में उम्मीदवार का दोषी साबित होना नहीं है। आरोपों की जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी।





