नई दिल्ली। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में बड़ी हलचल के बीच अमेरिकी AI स्टार्टअप कंपनी एंथ्रोपिक ने अपने सबसे एडवांस AI मॉडल्स ‘क्लाउड फेबल 5’ और ‘मिथॉस 5’ को दुनियाभर में बंद कर दिया है। कंपनी ने यह कदम अमेरिकी सरकार के उस आदेश के बाद उठाया है, जिसमें विदेशी नागरिकों को इन मॉडल्स का इस्तेमाल करने से रोकने के निर्देश दिए गए थे।
इस फैसले के बाद भारत समेत दुनिया के अन्य देशों के गैर-अमेरिकी नागरिक इन AI मॉडल्स का उपयोग नहीं कर पाएंगे। अमेरिकी अधिकारियों ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और संभावित साइबर हमलों के खतरे को कारण बताया है। यह पहली बार है जब किसी सरकार ने AI सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल पर इस तरह की पाबंदी लगाई है। इससे पहले प्रतिबंधों का फोकस मुख्य रूप से AI चिप्स और हार्डवेयर तक सीमित रहा था।
अमेरिकी सरकार को आशंका है कि इन अत्याधुनिक AI मॉडल्स का गलत इस्तेमाल कर सुरक्षा प्रणाली को बायपास किया जा सकता है। इसे तकनीकी भाषा में ‘जेलब्रेक’ कहा जाता है। इसके जरिए साइबर अपराधी कंप्यूटर सिस्टम की कमजोरियां खोजने, सरकारी डेटा चुराने, बैंकिंग नेटवर्क और महत्वपूर्ण ढांचों पर हमले करने जैसी गतिविधियों को अंजाम दे सकते हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षण के दौरान कुछ विशेष प्रॉम्प्ट्स की मदद से एंथ्रोपिक के AI मॉडल से सॉफ्टवेयर की कमजोरियां सामने आई थीं। इसकी जानकारी अमेरिकी वाणिज्य विभाग को दी गई, जिसके बाद सरकार ने कड़ा कदम उठाया।
हालांकि एंथ्रोपिक ने इस प्रतिबंध को गलत बताया है। कंपनी का कहना है कि सामने आई कमियां सीमित थीं और अन्य सार्वजनिक AI मॉडल्स में भी ऐसी क्षमताएं मौजूद हैं। कंपनी ने दावा किया कि लॉन्च से पहले अमेरिकी सरकारी एजेंसियों और ब्रिटेन के AI सेफ्टी इंस्टीट्यूट के साथ विस्तृत परीक्षण किया गया था।
एंथ्रोपिक और अमेरिकी प्रशासन के बीच पहले से ही मतभेद चल रहे हैं। कंपनी ने सुरक्षा एजेंसियों को घरेलू निगरानी और पूरी तरह स्वचालित हथियारों में AI मॉडल के उपयोग की अनुमति देने से इनकार किया था। इसके बाद कंपनी को लेकर विवाद बढ़ गया था।
इस फैसले पर जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने चिंता जताते हुए कहा कि भारत को अपनी सॉवरेन AI क्षमता विकसित करने पर तेजी से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में तकनीकी निर्भरता चुनौती बन सकती है और देशों को अपने AI सिस्टम तथा ओपन-सोर्स तकनीक को बढ़ावा देना होगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह घटना वैश्विक AI प्रतिस्पर्धा में सुरक्षा, नियंत्रण और तकनीकी आत्मनिर्भरता के मुद्दों को और महत्वपूर्ण बना रही है।
