मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति इन दिनों भारी उथल-पुथल से गुजर रही है, और इसके केंद्र में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे लगातार चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। एक ओर जहां डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों ने उद्धव गुट को बड़ा झटका दिया, वहीं अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) में भी उनकी पार्टी को एक और नुकसान उठाना पड़ा है।
ताजा घटनाक्रम में बीएमसी के एक नगरसेवक की सदस्यता रद्द कर दी गई है, जिससे सदन में शिवसेना (UBT) के नगरसेवकों की संख्या 65 से घटकर 64 रह गई है। यह कार्रवाई जाति प्रमाणपत्र जांच से जुड़े एक फैसले के बाद की गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, शिवसेना (UBT) के नगरसेवक दीपक सावंत, जो वार्ड क्रमांक 111 (कांजुरमार्ग) से निर्वाचित हुए थे, का ओबीसी जाति प्रमाणपत्र जाति प्रमाणपत्र जांच समिति द्वारा अमान्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद प्रशासन को प्राप्त आदेश के आधार पर मुंबई की महापौर ऋतु तावड़े ने बीएमसी महासभा में उनकी सदस्यता समाप्त करने की घोषणा की। चूंकि सावंत ओबीसी आरक्षित सीट से चुने गए थे, इसलिए प्रमाणपत्र अवैध पाए जाने के बाद उनकी सदस्यता स्वतः समाप्त मानी गई।
इस फैसले के बाद मुंबई की राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है और इसे उद्धव ठाकरे गुट के लिए एक और झटका माना जा रहा है।
इसी बीच, गोवंडी के वार्ड क्रमांक 137 से एआईएमआईएम के नगरसेवक शमीर रमज़ान पटेल के मामले में भी जाति प्रमाणपत्र को अमान्य घोषित किया गया है। हालांकि, उन्हें अदालत से अंतरिम राहत मिल गई है। अदालत ने जाति जांच समिति के आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिससे वे फिलहाल अपने पद पर बने रहेंगे।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र की राजनीति पहले से ही शिवसेना में टूट, गुटबाजी और विधायकों-सांसदों के अलग होने जैसे बड़े घटनाक्रमों से प्रभावित रही है। ऐसे में बीएमसी में यह ताजा कार्रवाई उद्धव ठाकरे गुट के लिए राजनीतिक रूप से एक और चुनौती के रूप में देखी जा रही है।
