राष्ट्रीय हथकरघा दिवस: CM साय ने बांटे 10.90 करोड़ से ज्यादा के अनुदान, ‘कोशल फैब’ ब्रांड लॉन्च; बोले- लोकल टू ग्लोबल बनेगा छत्तीसगढ़ का हैंडलूम

रायपुर। राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने शुक्रवार को राजधानी रायपुर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में हिस्सा लिया।
इस दौरान उन्होंने रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, खादी एवं माटीकला बोर्ड के हितग्राहियों और मेधावी छात्र-छात्राओं को 10.90 करोड़ रुपये से अधिक की अनुदान एवं पुरस्कार राशि वितरित की।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा संघ के नए प्रीमियम हैंडलूम ब्रांड ‘कोशल फैब’ का शुभारंभ करते हुए उसका लोगो और कैटलॉग जारी किया। साथ ही हथकरघा इन्वेंट्री मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर भी लॉन्च किया।
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि 7 अगस्त 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाया जाता है। आज छत्तीसगढ़ का कोसा, बस्तर की बुनाई और पारंपरिक हथकरघा उत्पाद देश-दुनिया में अपनी अलग पहचान बना रहे हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य इन्हें ‘लोकल टू ग्लोबल’ बनाना है। इसके लिए आधुनिक डिजाइन, ब्रांडिंग, प्रशिक्षण और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर लगातार काम किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में 469 बुनकर परिवारों के लिए बुनकर शेड सह आवास स्वीकृत किए गए हैं। 47 प्रदर्शनियों के जरिए करीब 10 करोड़ रुपये के हथकरघा उत्पादों की बिक्री हुई है।
वहीं 2,001 महिला स्व-सहायता समूहों को सिलाई पारिश्रमिक के रूप में 68 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। सरकार ने 436 करोड़ रुपये के हथकरघा वस्त्रों की शासकीय खरीदी कर बुनकरों को आर्थिक संबल भी दिया है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने स्वदेशी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और हथकरघा स्टॉल से स्वयं भुगतान कर कोसा साड़ी खरीदी। उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पाद खरीदना बुनकरों और शिल्पकारों के श्रम का सबसे बड़ा सम्मान है।
समारोह का सबसे आकर्षक क्षण तब रहा, जब बस्तर की आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने कोसा परिधानों में रैंप वॉक कर आत्मविश्वास और पुनर्वास की नई तस्वीर पेश की।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से ‘सेल्फी विद स्वदेशी’ अभियान से जुड़कर स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की भी अपील की।





