छत्तीसगढ़ के 3 निजी मेडिकल कॉलेजों पर ज्यादा फीस वसूली का आरोप, FIR की मांग

प्रति विद्यार्थी 4.58 लाख रुपए तक की वापसी का दावा; फीस विनियामक समिति के आदेश के बावजूद रकम नहीं लौटाने की शिकायत
रायपुर। छत्तीसगढ़ के तीन निजी मेडिकल कॉलेजों पर विद्यार्थियों से निर्धारित फीस से अधिक राशि वसूलने और आदेश के बावजूद रकम वापस नहीं करने का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता निश्चय वाजपेयी ने रायपुर पुलिस कमिश्नर को लिखित शिकायत सौंपकर संबंधित कॉलेजों के संचालकों, प्रबंधन और फीस वसूली के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
शिकायत में श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, जुनवानी भिलाई; रायपुर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, भनसोज और श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस, मोवा का उल्लेख है। आरोप है कि इन संस्थानों ने तय फीस से ज्यादा रकम ली, लेकिन शासन के निर्देश के बाद भी विद्यार्थियों को अतिरिक्त राशि नहीं लौटाई।
प्रति विद्यार्थी 4 लाख रुपए से ज्यादा की राशि
शिकायतकर्ता के मुताबिक, श्री शंकराचार्य इंस्टीट्यूट में प्रति विद्यार्थी 4 लाख 43 हजार 173 रुपए, रायपुर इंस्टीट्यूट में 4 लाख 53 हजार 593 रुपए और श्री बालाजी इंस्टीट्यूट में 4 लाख 58 हजार 222 रुपए अतिरिक्त फीस के रूप में वापस किए जाने का दावा है। इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
आदेश के बाद भी फीस नहीं लौटाने का आरोप
शिकायत में प्रवेश तथा फीस विनियामक समिति के 3 अप्रैल 2025 के निर्णय और चिकित्सा शिक्षा विभाग के 23 सितंबर 2025 के आदेश का हवाला दिया गया है। इसके अनुसार, अतिरिक्त फीस एक महीने के भीतर लौटाने और देरी होने पर 7 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ भुगतान करने का प्रावधान बताया गया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद विद्यार्थियों को राहत नहीं मिली। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में भी निर्धारित फीस से अधिक वसूली की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है।
BNS की धाराओं में कार्रवाई की मांग
निश्चय वाजपेयी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 308, 316 और 223 सहित अन्य लागू प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है। साथ ही फीस वसूली की प्रक्रिया, अतिरिक्त रकम के इस्तेमाल और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की जांच कराने का अनुरोध किया है।
फिलहाल एफआईआर दर्ज होने या पुलिस की कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित कॉलेज प्रबंधन का पक्ष भी सामने नहीं आया है। आरोपों की सच्चाई और फीस वापसी की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।





