900 ग्राम के नवजात को जिला अस्पताल में मिला नया जीवन, दो महीने में वजन बढ़कर 1.35 किलो हुआ

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के एसएनसीयू में गंभीर हालत में था भर्ती, दो सप्ताह ऑक्सीजन सपोर्ट और दो यूनिट रक्त चढ़ाकर बचाई जान

रायपुर। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला अस्पताल में चिकित्सकों ने महज 900 ग्राम वजन के नवजात शिशु को नया जीवन दिया है। समय से पहले जन्मे इस बच्चे को सांस लेने में परेशानी और गंभीर एनीमिया की समस्या थी।

करीब दो महीने तक विशेष उपचार और देखभाल के बाद उसका वजन बढ़कर 1.35 किलोग्राम हो गया। स्वास्थ्य में सुधार के बाद 8 अक्टूबर को उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

गौरेला विकासखंड के दूरस्थ वनांचल गांव चुकतीपानी निवासी गोमती के नवजात की हालत जन्म के बाद गंभीर थी। उसे जिला अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती कराया गया। यहां चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने उसकी स्थिति को देखते हुए तत्काल उपचार शुरू किया। लगातार निगरानी के साथ पोषण और अन्य जरूरी चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट

नवजात को सांस लेने में परेशानी के कारण लगभग दो सप्ताह तक ऑक्सीजन सपोर्ट दिया गया। गंभीर एनीमिया के उपचार के लिए दो यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया। इसके अलावा शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने, नियमित फीडिंग और वजन बढ़ाने के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) सहित जरूरी देखभाल की गई। लगातार उपचार से बच्चे की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हुआ।

डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की मेहनत रंग लाई

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. रामेश्वर शर्मा के मार्गदर्शन और सिविल सर्जन डॉ. देवेंद्र सिंह पैकरा के निर्देशन में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. भरत भूषण त्रिपाठी, डॉ. अनिश ताम्रकार, डॉ. श्याम और एसएनसीयू के नर्सिंग स्टाफ ने उपचार में अहम भूमिका निभाई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। जिला अस्पताल में अत्यंत कम वजन वाले नवजात का सफल उपचार इस बात का उदाहरण है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध विशेष चिकित्सा सुविधाएं गंभीर परिस्थितियों में भी परिवारों के लिए जीवनरक्षक साबित हो सकती हैं।

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