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जंगल की पगडंडी से ‘माई का मंडप’ तक, 90 छात्रों ने समझा जनजातीय पर्यटन

रायपुर। विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के ग्राम पंचायत थाड़पथरा में ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन पर कार्यशाला और फील्ड विजिट का आयोजन किया गया। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू), अमरकंटक के पर्यटन प्रबंधन विभाग के 90 विद्यार्थियों ने इसमें हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने प्राकृतिक परिवेश के बीच ग्रामीण और जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं को समझा।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों ने मडहाउस परिसर से घने जंगलों और अमरावती गंगा नदी के प्राकृतिक क्षेत्र से होते हुए कमरापथरा मार्ग पर ट्रैकिंग की। इसके बाद ‘माई का मंडप’ तक पहुंचकर प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिवेश को करीब से देखा। फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि स्थानीय प्राकृतिक संसाधनों और संस्कृति को संरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को कैसे विकसित किया जा सकता है।

बैगा जीवनशैली और परंपराओं की जानकारी

विद्यार्थियों ने बैगा जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, रहन-सहन, खान-पान और गोदना परंपरा को समझा। स्थानीय लोगों से संवाद के दौरान उन्होंने जाना कि जनजातीय पर्यटन को केवल प्राकृतिक स्थलों तक सीमित न रखकर लोकजीवन, कला, भोजन और सांस्कृतिक विरासत से भी जोड़ा जा सकता है।

थाड़पथरा पर्यटन समिति ने विद्यार्थियों का स्वागत कर उन्हें स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया। इससे विद्यार्थियों को ग्रामीण खान-पान और जीवनशैली को पर्यटन अनुभव से जोड़ने की जानकारी मिली।

समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल समझाया

पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम, ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन प्रबंधक अभिषेक जायसवाल और पर्यटन समन्वयक हर्ष सोनी ने विद्यार्थियों को समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की जानकारी दी। उन्होंने स्थानीय लोगों की भागीदारी, प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण तथा रोजगार और आजीविका के अवसरों के बारे में बताया।

कार्यक्रम पर्यटन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत सिंह सहित अन्य शिक्षकों के मार्गदर्शन में हुआ। फील्ड विजिट ने विद्यार्थियों को पर्यटन प्रबंधन की पुस्तकीय जानकारी को जमीनी अनुभव से जोड़ने का अवसर दिया।

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