राजस्व मामलों के निपटारे में तेजी, छत्तीसगढ़ में 81.35% प्रकरण हल

रायपुर। छत्तीसगढ़ में भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों के निपटारे की रफ्तार बढ़ी है। राज्यभर के राजस्व न्यायालयों में दर्ज 4 लाख 67 हजार 415 प्रकरणों में से 3 लाख 80 हजार 224 का निराकरण किया जा चुका है। इस तरह कुल 81.35 प्रतिशत मामलों का निपटारा हुआ है। अब 87 हजार 191 प्रकरण लंबित हैं, जिन्हें समयबद्ध तरीके से सुलझाने के लिए विभाग स्तर पर मॉनिटरिंग की जा रही है।
राजस्व न्यायालयों में नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा और स्वामित्व जैसे मामलों का सीधा संबंध आम लोगों की जमीन और आजीविका से है। मामलों के जल्द निपटारे से लोगों को लंबे समय तक कार्यालयों और अदालतों के चक्कर लगाने से राहत मिल सकती है। विभाग के मुताबिक लंबित प्रकरणों का समयावधि के आधार पर वर्गीकरण कर पुराने मामलों को प्राथमिकता दी जा रही है।
सुकमा में 92.70% मामलों का निराकरण
जिलों के प्रदर्शन में सुकमा 92.70 प्रतिशत निराकरण के साथ आगे है। यहां 7,224 में से 6,697 प्रकरणों का निपटारा किया गया। नारायणपुर में 92.28 प्रतिशत, दंतेवाड़ा में 91.50 प्रतिशत और बीजापुर में 89.67 प्रतिशत मामलों का निराकरण हुआ है।
बड़े जिलों में रायपुर में 34,226 में से 29,824, बिलासपुर में 29,495 में से 24,539 और बस्तर में 17,600 में से 15,745 प्रकरणों का निपटारा किया गया। बलौदाबाजार-भाटापारा, जांजगीर-चांपा और कोरबा में भी बड़ी संख्या में मामलों का समाधान हुआ है।
पुराने मामलों की अलग निगरानी
लंबित 87,191 प्रकरणों में 51,401 मामले 6 माह तक पुराने हैं। 13,218 प्रकरण 6 माह से एक वर्ष, 15,918 मामले 1 से 3 वर्ष, 3,903 मामले 3 से 5 वर्ष और 2,751 प्रकरण 5 वर्ष से अधिक पुराने हैं। विभाग ने पुराने मामलों को प्राथमिकता से निपटाने के लिए वर्गीकरण किया है।
भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन पर भी जोर
राजस्व मामलों के साथ भू-अभिलेखों को मजबूत करने के लिए ई-धरती और आधुनिक सर्वेक्षण तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। 431 वन ग्राम से परिवर्तित राजस्व ग्राम और 596 असर्वेक्षित या मसाहती ग्रामों समेत 1,027 गांवों को सर्वे के लिए चिन्हित किया गया है। इनमें 284 गांवों का सर्वे पूरा कर डेटा भुइयां पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। अबूझमाड़ और नारायणपुर के गांवों में भी सर्वेक्षण और डिजिटल नक्शे तैयार करने की प्रक्रिया जारी है।





