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रूस से तेल खरीदने पर भारत पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव, अमेरिकी हाउस में आज वोटिंग

दिल्ली। रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने वाला अमेरिकी विधेयक अब प्रतिनिधि सभा में पहुंच गया है। अमेरिकी हाउस ने मंगलवार को इस बिल को आगे बढ़ाने के लिए 214-211 से प्रक्रियात्मक मंजूरी दी। अब 16 सितंबर को इस पर अंतिम वोटिंग होनी है। बिल पास होने के बाद इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। हालांकि, भारत पर तुरंत 100 फीसदी टैरिफ लगना तय नहीं है।

भारत समेत 10 देशों के नाम जोड़ने का प्रस्ताव

यह बिल रूस के ऊर्जा क्षेत्र और प्रतिबंधों से बचने वाले जहाजों पर भी कार्रवाई का प्रावधान करता है। सीनेट में 7 अगस्त को यह विधेयक 86-11 वोट से पास हुआ था। सीनेट के संस्करण में रूस के तेल-गैस के बड़े खरीदारों के नाम सीधे नहीं दिए गए थे, बल्कि पांच सबसे बड़े खरीदारों पर टैरिफ लगाने का अधिकार प्रस्तावित किया गया था।

हाउस में डेमोक्रेट सांसद स्टेनी होयर ने संशोधन पेश कर भारत, चीन समेत 10 देशों को सीधे संभावित टैरिफ के दायरे में रखने का प्रस्ताव दिया है। सूची में तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, यूएई, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान भी शामिल हैं।

टैरिफ लगाने का फैसला तत्काल नहीं होगा

प्रस्तावित कानून राष्ट्रपति को रूस से ऊर्जा खरीदने वाले बड़े खरीदार देशों पर 100 फीसदी तक शुल्क लगाने का अधिकार देगा। इसलिए विधेयक के कानून बनने का अर्थ यह नहीं है कि भारत पर उसी दिन 100 फीसदी टैरिफ लागू हो जाएगा। राष्ट्रपति के पास इसे लागू करने का अधिकार होगा।

भारत ने ऊर्जा हितों पर दिया जोर

भारत सरकार ने कहा है कि देश की ऊर्जा जरूरतों से जुड़े फैसले भारतीय उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों के आधार पर नीतिगत फैसले करता है। इस बीच केंद्र सरकार मामले पर नजर बनाए हुए है।

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