CM साय बोले- बस्तर जैसा विकास चाहेगा, सरकार उसी दिशा में बढ़ेगी

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि बस्तर के विकास की दिशा वहां की जनता की आकांक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप तय होगी। बस्तर के लोगों को किसी तरह के भ्रम में रहने की जरूरत नहीं है। सरकार कृषि, पर्यटन, पशुपालन और स्थानीय संसाधनों के आधार पर रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ाने पर काम कर रही है। बस्तर की जनता जैसा विकास चाहेगी, सरकार उसी दिशा में आगे बढ़ेगी।
एक निजी समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने बस्तर के विकास, नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई और महिला सशक्तीकरण समेत कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद के कारण बस्तर विकास की मुख्यधारा से पीछे रहा। अब नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई निर्णायक दौर में है और क्षेत्र में शांति का वातावरण बन रहा है।
बड़े उद्योगों के लिए रास्ता बनाने का आरोप खारिज
मुख्यमंत्री ने उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा है कि नक्सलवाद खत्म करने के पीछे सरकार का उद्देश्य बड़े उद्योगों के लिए रास्ता तैयार करना है। उन्होंने कहा कि बस्तर का भविष्य वहां के लोगों की इच्छा और जरूरतों के अनुसार ही तय होगा।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग नए नैरेटिव के जरिए बस्तर के लोगों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। सरकार का उद्देश्य बस्तर की प्राकृतिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संभावनाओं को आगे बढ़ाकर स्थानीय लोगों के जीवन में समृद्धि लाना है।
कृषि, पशुपालन और पर्यटन पर जोर
सीएम साय ने कहा कि बस्तर में कृषि को मजबूत करने, पशुपालन को बढ़ावा देने और पर्यटन की संभावनाओं को अवसरों में बदलने पर काम किया जा रहा है। शांति स्थापित होने के बाद दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंच रहा है। युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी तैयार हो रहे हैं।
बोले- बहनों का ‘भैया’ कहना सबसे बड़ा सौभाग्य
महिलाओं के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की बहनें उन्हें ‘विष्णु भैया’ कहकर परिवार का सदस्य मानती हैं। उन्होंने कहा कि बहनों से मिलने वाला स्नेह और आशीर्वाद जनसेवा के लिए प्रेरित करता है। एक भाई के रूप में महिलाओं की सेवा, सुरक्षा और खुशहाली उनका संकल्प है।
उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने के साथ उनके सम्मान, स्वाभिमान और सुरक्षा के लिए काम कर रही है। सरकार का प्रयास है कि विकास में जनता की भागीदारी हो और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।





