ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: निवेशकों की पहली पसंद बन रहा छत्तीसगढ़, सरकार के फैसलों से बदली तस्वीर

रायपुर। छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज संपदा वाले राज्य की पहचान तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि औद्योगिक विस्तार, तकनीकी निवेश और रोजगार सृजन के जरिए विकसित राज्य बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल तैयार करने की सरकारी पहल ने प्रदेश को निवेशकों के लिए एक आकर्षक गंतव्य के रूप में स्थापित करना शुरू कर दिया है।
किसी भी राज्य की आर्थिक प्रगति इस बात पर निर्भर करती है कि वहां उद्योग स्थापित करना कितना आसान है। उद्योग शुरू करने की प्रक्रिया को सरल बनाना, सरकारी अनुमतियों को समयबद्ध करना, अनावश्यक औपचारिकताओं को कम करना और कारोबार को डिजिटल माध्यम से संचालित करना ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस का मूल आधार माना जाता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन के नेतृत्व में प्रदेश में निवेश आधारित विकास मॉडल को बढ़ावा दिया जा रहा है। सरकार का फोकस केवल बड़े उद्योगों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार, नई तकनीक को बढ़ावा देने और क्षेत्रीय संतुलन के साथ औद्योगिक विस्तार पर भी है।
आधुनिक सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया
उद्योगों से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए राज्य में आधुनिक सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया गया है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से 150 से अधिक सेवाओं को एकीकृत किया गया है। अब उद्योग स्थापित करने के लिए अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं है। निवेशकों को ऑनलाइन माध्यम से अधिकांश स्वीकृतियां उपलब्ध कराई जा रही हैं।
इसके अलावा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित ‘वाणी’ प्रणाली भी शुरू की गई है, जिससे निवेशकों को तकनीकी सहायता मिल रही है। प्रशासनिक सुधार के तहत 500 से अधिक प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, जिससे उद्योगों की स्थापना में तेजी आई है।
2024-30 को नए निवेश का आधार माना जा रहा
प्रदेश की औद्योगिक विकास नीति 2024-30 को नए निवेश का आधार माना जा रहा है। इस नीति के तहत विनिर्माण और सेवा क्षेत्र को विशेष वित्तीय प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पहली बार एमएसएमई, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, फार्मास्यूटिकल्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे उभरते क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
प्रदेश में 23 नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और 15 जिलों में 26 नई औद्योगिक परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। सरोरा में विकसित हो रहा प्लास्टिक पार्क और नवा रायपुर में तैयार हो रहा टेक्सटाइल, फार्मा और रेडीमेड गारमेंट पार्क औद्योगिक विस्तार की नई तस्वीर पेश कर रहे हैं।
नवा रायपुर में 235 करोड़ रुपए की लागत से स्थापित होने वाली टेक्सटाइल इकाई से 4,650 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलने की संभावना है। वहीं, पिछले ढाई वर्षों में राज्य को 8.22 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इससे 1.72 लाख से अधिक रोजगार सृजित होने का अनुमान है। इसी अवधि में 3,009 नई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हुई हैं, जिनसे 50 हजार से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा प्रदेश
प्रदेश अब कोयला और इस्पात आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़कर डिजिटल और तकनीकी क्षेत्र में भी अपनी पहचान बना रहा है।
नवा रायपुर में 1,000 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला एआई डेटा सेंटर पार्क इसी बदलाव का उदाहरण है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ को ऐसा राज्य बनाना है, जहां युवा नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाले उद्यमी बनकर उभरें।





