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कर्नाटक कैबिनेट में कलह: पसंदीदा विभाग नहीं मिलने पर मंत्री रामलिंगा रेड्डी का इस्तीफा

बेंगलुरु। कर्नाटक की नई सरकार में विभागों के बंटवारे के बाद असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार की कैबिनेट में शामिल वरिष्ठ मंत्री रामलिंगा रेड्‌डी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। रेड्डी अपने पसंदीदा बेंगलुरु विकास विभाग की मांग कर रहे थे, लेकिन उन्हें जल संसाधन विभाग सौंपा गया, जिससे नाराज होकर उन्होंने यह कदम उठाया।

शुक्रवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामलिंगा रेड्डी ने अपने इस्तीफे की प्रति दिखाते हुए कहा कि उन्होंने कांग्रेस पार्टी नहीं छोड़ी है और वे पार्टी के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 53 वर्षों से कांग्रेस के साथ जुड़े हैं और कई मुख्यमंत्रियों के कार्यकाल में मंत्री के रूप में काम कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने कभी किसी से मंत्री पद की मांग नहीं की, लेकिन इस बार उनके साथ किए गए वादे को पूरा नहीं किया गया।

जानकारी के मुताबिक, विभागों के बंटवारे को लेकर गुरुवार को हुई पहली कैबिनेट बैठक के दौरान भी रेड्डी ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी और बैठक बीच में छोड़कर बाहर चले गए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री को वर्ष 2023 में किए गए उस वादे की याद दिलाई थी, जिसमें कैबिनेट विस्तार या फेरबदल की स्थिति में उन्हें बेंगलुरु विकास विभाग देने की बात कही गई थी।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने हाल ही में 13 मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा किया है। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकर्जुन खड़गे के बेटे प्रियांक खड़गे को गृह विभाग (इंटेलिजेंस को छोड़कर) की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं मुख्यमंत्री ने वित्त, कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार, कैबिनेट मामलों और इंटेलिजेंस जैसे महत्वपूर्ण विभाग अपने पास रखे हैं।

रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे को नई सरकार के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। अब कांग्रेस नेतृत्व के सामने नाराज नेताओं को मनाने और सरकार में संतुलन बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।

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