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विकास, विश्वास और सुशासन का सेतु बना कोण्डापल्ली का बेली ब्रिज

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने किया निरीक्षण, कहा- दूरस्थ क्षेत्रों तक विकास पहुंचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता

बीजापुर। बीजापुर जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित कोण्डापल्ली अब विकास की नई पहचान बनकर उभर रहा है। प्रदेशव्यापी सुशासन तिहार के तहत मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंगलवार को बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित आधुनिक बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुल की निर्माण तकनीक, उपयोगिता और क्षेत्र के विकास में उसकी भूमिका की जानकारी ली तथा इसे बदलते बस्तर का प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क, पुल और अन्य आधारभूत सुविधाएं केवल निर्माण कार्य नहीं हैं, बल्कि ये दूरस्थ क्षेत्रों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और विकास की मुख्यधारा से जोड़ने वाले मजबूत माध्यम हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे और किसी भी क्षेत्र को मूलभूत सुविधाओं से वंचित न रहना पड़े।

निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने बताया कि भारतीय सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज बीजापुर-पूवर्ती सड़क परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आधुनिक तकनीक से तैयार किए गए ये पुल पारंपरिक पुलों की तुलना में अधिक मजबूत, टिकाऊ और किफायती होते हैं। इनका निर्माण सामान्य पुलों की अपेक्षा लगभग पांच गुना कम लागत में और बेहद कम समय में किया जा सकता है। दुर्गम और संवेदनशील इलाकों में त्वरित कनेक्टिविटी स्थापित करने के लिए यह तकनीक बेहद प्रभावी साबित हो रही है।

बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिजों का निर्माण किया जा चुका है। इन पुलों से दूरस्थ गांवों तक आवागमन आसान हुआ है और लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बाजार तथा अन्य आवश्यक सेवाओं तक पहुंचने में बड़ी सुविधा मिली है। इससे क्षेत्र में विकास कार्यों को भी नई गति मिली है।

मुख्यमंत्री ने निर्माण कार्य में लगे श्रमिकों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि विकास यात्रा के वास्तविक निर्माता प्रदेश के श्रमिक और युवा हैं। उन्होंने कहा कि कोण्डापल्ली का यह बेली ब्रिज केवल एक पुल नहीं, बल्कि विकास, विश्वास और सुशासन का सशक्त प्रतीक है, जो नए और विकसित होते बस्तर की पहचान बन चुका है।

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