सबरीमाला में महिलाओं की एंट्री पर सुनवाई आज: सुप्रीम कोर्ट में कई धार्मिक प्रथाओं पर होगी अहम बहस

नई दिल्ली। केरल के प्रसिद्ध सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर आज से सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की संविधान पीठ सुनवाई शुरू कर रही है। यह मामला सिर्फ मंदिर तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं के धार्मिक अधिकारों से जुड़े कई बड़े सवालों पर भी फैसला तय करेगा।
सुनवाई के दौरान दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं के खतना, मस्जिदों में महिलाओं के नमाज पढ़ने के अधिकार और पारसी महिलाओं के अग्नि मंदिर में प्रवेश जैसे मुद्दों पर भी बहस होगी। ये सभी मामले पिछले करीब 26 वर्षों से विभिन्न अदालतों में लंबित हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सुबह 10:30 बजे से शुरू होगी, जिसमें 7 से 9 अप्रैल तक याचिकाकर्ता पक्ष अपनी दलीलें रखेगा, जबकि विरोधी पक्ष 14 से 16 अप्रैल के बीच तर्क प्रस्तुत करेगा।
गौरतलब है कि 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी आयु वर्ग की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी। इसके बाद 2 जनवरी 2019 को बिंदु कनकदुर्गा और बिंदु अम्मिनी पहली बार मंदिर में प्रवेश करने वाली महिलाएं बनीं। हालांकि इस फैसले के खिलाफ व्यापक विरोध हुआ और मंदिर की “शुद्धि” भी कराई गई।
अब 9 जजों की बेंच यह तय करेगी कि धार्मिक स्वतंत्रता (अनुच्छेद 25) और समानता के अधिकार (अनुच्छेद 14) के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि क्या व्यक्तिगत धार्मिक प्रथाएं मौलिक अधिकारों की कसौटी पर परखी जा सकती हैं।
इस सुनवाई का फैसला भविष्य में धार्मिक मामलों में न्यायपालिका के दखल की सीमा तय कर सकता है और महिलाओं के अधिकारों पर दूरगामी प्रभाव डाल सकता है।





