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रायपुर के अर्बन नक्सली पेन ड्राइव और लेटर से भेजते थे गोपनीय जानकारी, एसआईए के अभियोग पत्र से खुलासा

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी में माओवादियों के शहरी नेटवर्क (Urban Network) को लेकर राज्य अन्वेषण अभिकरण (SIA) ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। मंगलवार को SIA ने बिलासपुर की विशेष अदालत में 9 गिरफ्तार नक्सलियों के खिलाफ अभियोग पत्र (Charge Sheet) दाखिल किया। ये नक्सली रायपुर के रिहायशी इलाकों में ‘मजदूर’ की पहचान छिपाकर रह रहे थे और डिजिटल माध्यमों से जंगल में बैठे आकाओं तक खुफिया सूचनाएं पहुंचाते थे।

चंगोरा भाठा बना था साजिश का केंद्र

SIA की जांच के मुताबिक, मुख्य आरोपी आकाश उर्फ पवन ने चंगोरा भाठा में किराए का मकान लिया था। खुद को दिहाड़ी मजदूर बताकर उसने शक से बचने का प्रयास किया। बाद में उसने नक्सली दंपत्ति जग्गू कुरसम और कमला कुरसम को भी यहीं लाकर रुकवाया। यह मकान ही शहरी नेटवर्क के हेडक्वार्टर के रूप में इस्तेमाल हो रहा था, जहां से रायपुर, बिलासपुर और सिमगा जैसे शहरों में मीटिंग्स की योजना बनती थी।

पेनड्राइव, कोडवर्ड और सोने के बिस्किट

जांच में नक्सलियों की हाई-टेक कार्यशैली सामने आई है। सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए पेनड्राइव और लिफाफों का इस्तेमाल होता था। बैठकों के लिए विशेष कोडवर्ड तय किए गए थे। SIA ने इनके पास से 300 ग्राम सोने के बिस्किट, 2.5 लाख रुपये नगद, लैपटॉप और बड़ी संख्या में मोबाइल जब्त किए हैं। गिरधर नाग और संदेव पोडियम जैसे सदस्य जंगल से विस्फोटक सामग्री लाते और शहर से रसद वापस ले जाते थे।

कॉल इंटरसेप्शन से खुले राज

इंटेलिजेंस को जग्गू और कमला के रायपुर लोकेशन से बस्तर बेल्ट में संपर्क होने के तकनीकी इनपुट मिले थे। 23 सितंबर 2025 को डीडी नगर पुलिस और SIA ने रात 11:30 बजे सिविल ड्रेस में रेड मारकर इस दंपत्ति को दबोचा। दरवाजा खुलते ही पुलिस ने उन्हें काबू किया और घर से 10 तोले सोना व नगदी बरामद की। गिरफ्तार 9 आरोपियों में जग्गू, कमला, रामा इचाम, पवन, धनसिंग और अन्य शामिल हैं। इन पर BNS और UAPA की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। SIA अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य मददगारों की तलाश कर रही है।

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