राजनीति

Vinod tiwari ने कहा- डॉ रमन सिंह ने PMO के निर्णय पर की ग़लत बयानी

रायपुर| (Vinod tiwari) डॉक्टर रमन सिंह द्वारा उनके खुद के ऊपर आय से अधिक सम्पत्ति के मामले में जांच चालू होने की आई तो

उनके द्वारा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की कार्य प्रणाली पर ही गलत बयानी कर डाली.

छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री व भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के विरुद्ध  प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) मे की गयी .

शिकायत पर वे इस कदर बेचैन हो गए कि उनके द्वारा उनके विरुद्ध की गई आर्थिक अनियमितताओं एवं आय से अधिक

(Vinod tiwari)अनुपात हीन संपत्ति की शिकायत पर प्रधानमंत्री कार्यालय के निर्णय पर गलतबयानी कर डाली.

जानकारी देते हुए विनोद तिवारी ने कहा की डॉ. रमन सिंह जी द्वारा जारी बयान में यह कहा गया कि विनोद तिवारी द्वारा PMO में शिकायत की गई थी.

लेकिन PMO ने इस शिकायत पत्र पर मामला जांच योग्य न पाकर नस्तिबद्ध कर दिया गया है.

जबकि वास्तविकता यह है कि शिकायत पंजीयन कर अवर सचिव लोक शिकायत अम्बुज शर्मा को जाँच हेतु भेजा गया है,

यह हास्यास्पद है कि डॉ. रमन सिंह जहां स्वयं 15 वर्ष तक मुख्यमंत्री रहे.

(Vinod tiwari)वहीं वे सत्तारूद दल के मातहत भी 4 वर्ष तक कार्य किए.

उन्हें यह भी ज्ञात न हो कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा अपनाई जाने वाली 4 चरण शिकायत निवारण प्रणाली में

से अभी उनके प्रकरण पर मात्र 02 चरण ही पूर्ण हो पाया है .

शेष 02 चरण अभी बाकी है.

जिसमें जांच प्रक्रिया व शिकायत पर लिया जाने वाला निर्णय का 02 चरण का स्तर अभी बाकी है |

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*डॉ. रमन सिंह यदि आम जनता हेतु सुलभ ऑनलाइन प्रणाली का उपयोग कर पाने में असमर्थ हैं.

तो वे अपने ही घर के उनके सुपुत्र अभिषेक सिंह के विरुद्ध विनोद तिवारी द्वारा

4 अगस्त को PMO में प्रस्तुत शिकायत पर PMO द्वारा लिए गए. संगयन 6 अगस्त पर विश्वास कर लेना चाहिए.

जिसमें PMO द्वारा Reason –“ Case already taken up for examination” (प्रकरण पूर्व से परीक्षण हेतु लिया जा चुका है) का लेख है*

 

PMO में पूरे देश से भारी संख्या में शिकायते होती है PMO शिकायतो का पंजीयन कर निराकरण हेतु संबंधित शाखा में भेजता है.

फिर संबंधित शाखा द्वारा अग्रिम कार्यवाही की जाती है.

मुख्यमंत्री  अपने मन से इसका आशय ये ना निकाले की PMO ने शिकायत को जाँच योग्य ना पाकर नस्तिबद्ध कर दिया है.

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ये PMO का सिस्टम है की मामला हस्तांतरित करने के बाद अपने स्टेट्स में केश क्लोज लिखते है

और नीचे उस ज़िम्मेदार व्यक्ति और विभाग का नाम लिखा जाता है.

जिसे शिकायत हस्तांतरित की गई हो जो की आगे कार्यवाही करते है

अतः डॉ. रमन सिंह को स्व स्फूर्त व सकारात्मक रुख का होकर भारत सरकार को जांच में सहयोग करना चाहिए.

ताकि छतीसगढ़ की जनता डॉ. रमन सिंह द्वारा की गई आर्थिक अनियमितताओं एवं आय से अधिक अनुपातहीन

संपत्ति मामले की एवं आय के स्रोत की वास्तविक स्थिती से अवगत हो सके.

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डॉ. रमन सिंह को बजाय गलत बयानी के अपने द्वारा व्यापक भ्रष्टाचार कर अर्जित 2003 से 2018 तक की अपनी

संपत्ति में सैकड़ों गुना वृद्धि कैसे हुई.

इस स्रोत के बारे में छत्तीसगढ़ की जनता को सार्वजनिक रूप से बयान बाजी करनी चाहिए.

क्योंकि आपके द्वारा छत्तीसगढ़ की जनता के सम्मुख 2003 की अपनी संपत्ति का जो विवरण दिया है.

वह  2018 में किस अनुपात में वृद्धि हुई है.

उसे 2018 के निर्वाचन शपथ पत्र के प्रारूप में जानकारी सार्वजनिक कर पारदर्शिता कायम करनी चाहिए

“ आख़िर डॉक्टर रमन सिंह अपनी 2003 की संपत्ति की जानकारी 2018 प्रारूप में क्यू नहीं देना चाहते

 

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