लव जिहाद रोकने का दावा; गरबा पंडालों में विहिप-बजरंग दल की निगरानी टीम रहेगी तैनात
मुंबई। महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान होने वाले गरबा और डांडिया आयोजनों को लेकर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने नए नियम जारी किए हैं। संगठन ने आयोजकों से गरबा में आने वाले लोगों के आधार कार्ड की जांच करने और हिंदू पहचान की पुष्टि के लिए माथे पर तिलक लगाने को कहा है। विहिप ने मुस्लिम समुदाय के लोगों को गरबा आयोजनों में शामिल नहीं करने का फैसला भी किया है।
विहिप का कहना है कि ये नियम कथित तौर पर ‘लव जिहाद’ को रोकने के लिए बनाए गए हैं। संगठन के मुताबिक महाराष्ट्र में नवरात्रि के दौरान एक लाख से ज्यादा स्थानों पर गरबा और डांडिया कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
विहिप बोली- नवरात्रि देवी की आराधना का पर्व
विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता और संयुक्त सचिव श्रीराज नायर ने कहा कि नवरात्रि केवल नाच-गाने का आयोजन नहीं, बल्कि देवी की आराधना का पर्व है। उन्होंने कहा कि नियम किसी समुदाय के विरोध के लिए नहीं, बल्कि एहतियाती कदम के तौर पर बनाए गए हैं।
उन्होंने बताया कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए गरबा मंडपों में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के निगरानी दस्ते तैनात किए जाएंगे।
मुंबई में बड़े आयोजनों में हजारों की भीड़
महाराष्ट्र में करीब 25 से 30 हजार सार्वजनिक गरबा मंडल बताए जाते हैं। मुंबई महानगर क्षेत्र में इनकी संख्या 3 हजार से ज्यादा है। मुंबई, ठाणे और नवी मुंबई में 50 से 70 बड़े मैदानों में व्यावसायिक गरबा आयोजन होते हैं। इनमें रोजाना 10 हजार से लेकर 40 हजार तक लोगों के पहुंचने का दावा किया गया है।
पहचान छिपाकर आने के आरोप
विहिप का कहना है कि पिछले वर्षों में गरबा आयोजनों में पहचान छिपाकर मुस्लिम युवकों के शामिल होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। संगठन इसी आधार पर पहचान जांच को जरूरी बता रहा है।
मध्य प्रदेश में भी गरबा आयोजनों को लेकर पहचान पत्र जांच की अपील की गई थी। इसके बाद कुछ आयोजकों ने गैर-हिंदुओं की एंट्री पर रोक लगाई थी। इंदौर में पहचान छिपाकर पंडाल में प्रवेश करने के आरोप में कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।
