रायपुर। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच लंबे समय से चल रहे महानदि जल विवाद को लेकर ट्रिब्यूनल ने सख्त रुख अपनाया है। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस बेला त्रिवेदी की अध्यक्षता में गठित ट्रिब्यूनल ने दोनों राज्यों को 10 दिनों के भीतर महानदी बेसिन में जल उपलब्धता के नए आंकड़े पेश करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 2 मई को तय की गई है।
सुनवाई के दौरान ओडिशा सरकार ने भीषण गर्मी का हवाला देते हुए महानदी से अधिक पानी की मांग की। राज्य का कहना है कि गर्मी के कारण जल संकट गहराता जा रहा है, जिससे अतिरिक्त पानी की जरूरत है। वहीं, छत्तीसगढ़ सरकार ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में जल स्तर काफी नीचे है और ऐसी स्थिति में अतिरिक्त पानी छोड़ना संभव नहीं है। अधिकारियों के मुताबिक, गर्मी के मौसम में नदी का प्राकृतिक प्रवाह कम हो जाता है, जिससे विवाद और बढ़ जाता है।
महानदी बेसिन में कुल 14 प्रमुख नदियां शामिल हैं। इनमें महानदी, शिवनाथ, हसदेव, अरपा, खारुन, पैरी, सोंढूर, मंद और जोंक का ऊपरी हिस्सा छत्तीसगढ़ में बहता है, जबकि ओडिशा में महानदी के साथ इब, तेल, आंग और जोंक का निचला हिस्सा प्रमुख है। करीब 900 किलोमीटर लंबी इस नदी का 357 किमी हिस्सा छत्तीसगढ़ और 494 किमी ओडिशा में आता है।
ट्रिब्यूनल ने हाल ही में पूरे बेसिन क्षेत्र का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लिया है। इससे पहले दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच भी बैठक हो चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस विवाद का समाधान वैज्ञानिक आंकड़ों और आपसी सहमति से ही संभव है, ताकि दोनों राज्यों की जल जरूरतों का संतुलन बनाए रखा जा सके।
