रायपुर। छत्तीसगढ़ का बारनवापारा वन्यजीव अभ्यारण्य आज देशभर में वन्यजीव संरक्षण और पारिस्थितिकी बहाली के सफल मॉडल के रूप में उभर रहा है।
बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में स्थित इस अभ्यारण्य में कभी विलुप्त हो चुके काले हिरणों की अब शानदार वापसी हुई है। वर्ष 2018 में शुरू हुई पुनर्वास योजना और वैज्ञानिक प्रयासों के बाद यहां काले हिरणों की संख्या करीब 200 तक पहुंच गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने लोकप्रिय कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस उपलब्धि का उल्लेख कर छत्तीसगढ़ के प्रयासों की सराहना की है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे राज्य की जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का परिणाम बताया है। उनके नेतृत्व में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
वन मंत्री केदार कश्यप और वन विभाग के अधिकारियों की निगरानी में फरवरी 2026 में 30 काले हिरणों को ‘सॉफ्ट रिलीज’ पद्धति से जंगल में छोड़ा गया था। इस प्रक्रिया में यह सुनिश्चित किया गया कि हिरण बिना तनाव के अपने प्राकृतिक वातावरण में आसानी से ढल सकें।
बारनवापारा में आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। हिरणों की सुरक्षा के लिए जीपीएस ट्रैकिंग, हाईटेक निगरानी और नियमित पेट्रोलिंग की व्यवस्था की गई है।
वहीं रामपुर ग्रासलैंड का वैज्ञानिक विकास, जल स्रोतों का संरक्षण और स्थानीय घास प्रजातियों का संवर्धन इस परियोजना की सफलता के प्रमुख कारण बने हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल देश के अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन सकता है। बारनवापारा में कुलाचें भरते काले हिरण यह संदेश दे रहे हैं कि यदि प्रकृति के संरक्षण के लिए ईमानदार प्रयास किए जाएं, तो खोई हुई जैव विविधता को फिर से लौटाया जा सकता है।
