रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रशासनिक अधिकारियों को आम जनता के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार करने के सख्त निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि अधिकारी शासन का चेहरा होते हैं, इसलिए उनका व्यवहार ही सरकार की छवि तय करता है। उन्होंने दो टूक कहा कि “लोगों की सुनें, लोगों को सुनाएं नहीं।”
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी नागरिक की समस्या को गंभीरता से सुनना प्रशासन की पहली जिम्मेदारी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल औपचारिक बातचीत से काम नहीं चलेगा, बल्कि समस्याओं के समाधान के प्रति संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच जरूरी है।
मुख्यमंत्री साय ने निर्देश दिए कि सभी विभागों में जनसमस्याओं के निराकरण की प्रक्रिया को सरल, प्रभावी और भरोसेमंद बनाया जाए। उन्होंने कहा कि जब कोई नागरिक सरकारी कार्यालय पहुंचे तो उसे यह महसूस होना चाहिए कि उसकी बात सुनी जा रही है और उसके साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि योजनाओं की सफलता केवल आंकड़ों से नहीं, बल्कि लोगों के अनुभव से मापी जाती है। इसलिए अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहकर लोगों से सीधे संवाद करना चाहिए। उन्होंने पारदर्शिता और जवाबदेही को प्रशासन की सबसे बड़ी ताकत बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि सुशासन केवल नीतियों से नहीं, बल्कि व्यवहार से स्थापित होता है। अगर अधिकारी सहज, सरल और सहयोगात्मक रवैया अपनाएं तो शिकायतें स्वतः कम होने लगेंगी।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 मई से 10 जून तक प्रदेशभर में “सुशासन तिहार 2026” आयोजित किया जा रहा है। इसके तहत ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में समाधान शिविर लगाए जाएंगे, जहां लोगों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जाएगा। मुख्यमंत्री स्वयं भी औचक निरीक्षण कर अधिकारियों के कामकाज और व्यवहार की समीक्षा करेंगे।
