पेसा कानून की मजबूरी: जशपुर के कन्डोरा में 26वीं बार भी नहीं चुने गए पंच, अब 27वें उपचुनाव की तैयारी

जशपुर। छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की कन्डोरा ग्राम पंचायत एक बार फिर चर्चा में है। यहां पंच पदों के लिए आयोजित उपचुनाव लगातार 26वीं बार भी असफल रहा। सोमवार को हुए उपचुनाव में पंचायत के सात आरक्षित वार्डों के लिए एक भी उम्मीदवार सामने नहीं आया, जिसके कारण अब 27वें उपचुनाव की तैयारी शुरू हो गई है। यह सिलसिला वर्ष 2001 से लगातार जारी है।

कुनकुरी विकासखंड की इस पंचायत में कुल 17 पंच पद हैं, जिनमें से सात सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। लेकिन लंबे समय तक गांव में कोई भी आदिवासी परिवार नहीं होने के कारण इन वार्डों में उम्मीदवार नहीं मिल पाए। जशपुर जिला अनुसूचित क्षेत्र और पेसा कानून के दायरे में आता है, जहां पंचायतों में अनुसूचित जनजाति को 50 प्रतिशत आरक्षण देना अनिवार्य है।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्तमान में गांव में अनुसूचित जनजाति के केवल चार परिवार रहते हैं, जिनके कुल 22 सदस्य हैं। इनमें से अधिकांश लोग चुनाव लड़ने में रुचि नहीं रखते। कुछ सदस्य सरकारी सेवाओं में हैं, जबकि अन्य चुनावी राजनीति से दूरी बनाए हुए हैं। यही वजह है कि वर्षों से पंच पद खाली पड़े हैं।

कन्डोरा पंचायत का इतिहास भी अनोखा है। वर्ष 2000 में परिसीमन के बाद गांव में कोई आदिवासी परिवार नहीं था। तब ग्रामीणों ने झारखंड के सिमडेगा से कुंती बाई को गांव बुलाकर सरपंच चुनाव लड़वाया था। वह बाद में दो बार सरपंच भी चुनी गईं। वर्तमान में उनकी रिश्तेदार भगवती राय पंचायत की सरपंच हैं।

जनपद पंचायत कुनकुरी के सीईओ प्रमोद सिंह ने कहा कि मामले की जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी जाएगी। वहीं पूर्व कमिश्नर महादेव कावरे का मानना है कि जिला प्रशासन को शासन को विस्तृत रिपोर्ट भेजनी चाहिए, ताकि नए परिसीमन के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सके।

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