नई दिल्ली। सीआरपीएफ जवान 23 मई 2012 से 4 दिसंबर 2012 तक बिना किसी को बताए छुट्टी पर चला गया था. जिसके बाद उससे डाक के माध्यम से छुट्टियों के विस्तार की मांग की गयी, लेकिन वो नहीं आया. बाद में जब वह काम पर लौटा तो उसकी नौकरी जा चुकी थी. लेकिन उसने हार नहीं मानी और मामले को लेकर कोर्ट गया. अब इस मामले में पटना उच्च न्यायालय ने सीआरपीएफ कर्मी के पक्ष में फैसला सुनाया है.
CRPF जवान ने कोर्ट के सामने अपना पूरा पक्ष रखा. उसने बताया कि वह कैंसर पीड़ित मां की देखभाल करने के लिए छुट्टी पर था. मां को उसकी जरूरत थी. वह अपनी मां को इस हाल में अकेला नहीं छोड़ सकता था. इसके बाद पटना उच्च न्यायालय ने कैंसर से पीड़ित अपनी मां की देखभाल के लिए 196 दिनों तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहने के कारण सेवा से बर्खास्त किए गए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कर्मी को बहाल करने का आदेश दिया.
न्यायमूर्ति पी.बी. बजंथरी और न्यायमूर्ति आलोक कुमार पांडे की पीठ ने मंगलवार को सीआरपीएफ के बर्खास्त सिपाही सुमित कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए अपने आदेश में कहा कि संबंधित प्रतिवादियों को निर्देश दिया जाता है कि वे अपीलकर्ता की सेवा को बहाल करें और कानून के अनुसार सेवाओं को विनियमित करें.