149 दिन बाद खुले बद्रीनाथ धाम के कपाट: CM और शंकराचार्य ने किए दर्शन, अनुकूल मौसम के संकेत

दिल्ली। उत्तराखंड के बद्रीनाथ मंदिर के कपाट 149 दिन बाद विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर जैसे ही मंदिर के द्वार खुले, सबसे पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामकी ने भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए। उनके बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पूजा-अर्चना की। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर में “जय बद्री विशाल” के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो गया।

कपाट खुलने के समय करीब 2 हजार श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद थे, जबकि दिनभर में लगभग 7 हजार लोगों के दर्शन करने का अनुमान है। परंपरा के अनुसार सबसे पहले छह महीने से जल रही अखंड ज्योति के दर्शन कराए गए, जिसे भगवान की निरंतर उपस्थिति का प्रतीक माना जाता है।

इस दौरान भगवान बद्रीविशाल पर चढ़ाया गया घृत कंबल हटाया गया। पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन चंद्र उनियाल के अनुसार इस वर्ष कंबल घी से लबालब और सुरक्षित मिला है, जिसे आने वाले समय में अनुकूल मौसम और अच्छी फसल का संकेत माना जा रहा है।

घृत कंबल विशेष परंपरा के तहत माणा गांव की कुंवारी कन्याओं द्वारा तैयार किया जाता है। इसे शुद्ध घी में डुबोकर भगवान की प्रतिमा पर ओढ़ाया जाता है और कपाट बंद होने के दौरान यह मूर्ति की रक्षा करता है। कंबल की स्थिति को हर वर्ष प्राकृतिक संकेत के रूप में देखा जाता है।

बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलने के साथ ही अब चारधाम यात्रा पूरी तरह शुरू हो गई है। इससे पहले गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ के कपाट भी खोले जा चुके हैं। इस साल लाखों श्रद्धालुओं के यात्रा में शामिल होने की उम्मीद है, जिससे प्रदेश में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

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