आर्मी चीफ बोले- शक्सगाम घाटी पर पाकिस्तान–चीन समझौता अवैध,भारत इसे नहीं मानता

5180 वर्ग किमी क्षेत्र से गुजरता है CPEC

दिल्ली। सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने स्पष्ट कहा है कि भारत शक्सगाम घाटी पर पाकिस्तान और चीन के बीच 1963 में हुए समझौते को अवैध मानता है और उसे किसी भी रूप में स्वीकार नहीं करता।

उन्होंने कहा कि शक्सगाम घाटी में किसी भी प्रकार की गतिविधि को भारत की मंजूरी नहीं है। यह टिप्पणी चीन द्वारा शक्सगाम क्षेत्र में बुनियादी ढांचा विकास और CPEC 2.0 से जुड़ी गतिविधियों के संदर्भ में आई है।

जनरल द्विवेदी ने कहा कि विदेश मंत्रालय पहले ही भारत की स्थिति साफ कर चुका है। चीन में जारी संयुक्त बयान और CPEC से जुड़ी परियोजनाओं को भारत दोनों देशों की ओर से की जा रही अवैध कार्रवाई मानता है। भारत के अनुसार, यह पूरा क्षेत्र जम्मू-कश्मीर का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर पाकिस्तान का कोई वैधानिक अधिकार नहीं था।

इससे पहले लद्दाख के उपराज्यपाल कवींद्र गुप्ता ने भी चीन के शक्सगाम घाटी पर दावे को सख्ती से खारिज किया था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाला पूरा कश्मीर भारत का हिस्सा है। गुप्ता ने दो टूक कहा कि भारत अब 1962 वाला नहीं बल्कि 2026 का भारत है और किसी भी विस्तारवादी कोशिश को नाकाम किया जाएगा।

शक्सगाम घाटी जम्मू-कश्मीर के उत्तरी हिस्से में काराकोरम पर्वत श्रृंखला में स्थित है। यह क्षेत्र करीब 5180 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है और सियाचिन ग्लेशियर के उत्तर-पूर्व में स्थित है। इसे ट्रांस-काराकोरम ट्रैक्ट भी कहा जाता है। वर्ष 1963 में पाकिस्तान ने इस क्षेत्र को चीन को सौंप दिया था, जिसे भारत ने शुरू से अवैध करार दिया है।

हाल के दिनों में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) के तहत शक्सगाम घाटी में ऑलवैदर रोड और अन्य निर्माण कार्यों की खबरों से भारत की चिंता बढ़ी है। सरकार का कहना है कि ऐसे प्रोजेक्ट क्षेत्र की जमीनी हकीकत बदलने की कोशिश हैं, जिसे भारत अपना संप्रभु क्षेत्र मानता है। भारत ने साफ कर दिया है कि वह शक्सगाम घाटी से जुड़ी किसी भी अवैध गतिविधि को स्वीकार नहीं करेगा।

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