ChhattisgarhStateNewsछत्तीसगढ़

डुंडेरा की नन्हीं जीविका का एम्स रायपुर में सफल कॉक्लियर इम्प्लांट, आरबीएसके टीम की पहल से मिली नई जिंदगी

रायपुर। राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ विकासखंड के ग्राम डुंडेरा की नन्हीं जीविका के जीवन में अब एक नई शुरुआत होने जा रही है। जन्म से सुनने में असमर्थ जीविका अब दुनिया की आवाजें सुन सकेगी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके-चिरायु) की पहल और समय पर इलाज के कारण एम्स रायपुर में उसका सफल कॉक्लियर इम्प्लांट किया गया है।

जीविका की समस्या का पता डुंडेरा के आंगनबाड़ी केंद्र क्रमांक-1 में नियमित स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चला। आरबीएसके टीम-ए, डोंगरगढ़ ने बच्ची की श्रवण बाधिता की पहचान कर तत्काल विशेषज्ञ जांच कराई और उसे एम्स रायपुर रेफर किया। वहां विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सफलतापूर्वक कॉक्लियर इम्प्लांट किया। अब नियमित स्पीच थेरेपी और पुनर्वास के जरिए जीविका धीरे-धीरे सुनना और बोलना सीख सकेगी।

समय पर पहचान बनी नई उम्मीद

परिजनों के लिए जीविका की स्थिति लंबे समय से चिंता का कारण थी। वह सामान्य बच्चों की तरह न तो सुन पा रही थी और न ही बोल पा रही थी। लेकिन आरबीएसके टीम की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई ने उसके जीवन की दिशा बदल दी। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर कॉक्लियर इम्प्लांट और नियमित थेरेपी से बच्चों के सामान्य विकास की संभावना काफी बढ़ जाती है।

हजारों बच्चों को मिल रहा मुफ्त इलाज

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जन्मजात विकार, पोषण संबंधी समस्याएं, विकास में देरी और अन्य गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर बच्चों को निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जाता है। जरूरत पड़ने पर उन्हें एम्स जैसे उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर आधुनिक इलाज की सुविधा भी दी जाती है।

जीविका की कहानी इस बात का उदाहरण है कि समय पर जांच और सही उपचार से बच्चों का भविष्य संवारा जा सकता है। डोंगरगढ़ की आरबीएसके टीम के प्रयासों से अब जीविका के जीवन में खामोशी की जगह आवाजों और नई उम्मीदों ने ले ली है।

Related Articles

Back to top button