
संदेश गुप्ता@धमतरी। (Skill level) मंजिल उन्हें मिलती है जिनके सपनो में जान होती है। सिर्फ पंखों से कुछ नही होता, हौसलों से उड़ान होती है।
इसी को चरितार्थ कर दिखाया है रायपुर के दिव्यांग जगमोहन ठाकुर ने। किसी के दिव्यांग होने में उसकी खुद की कोई गलती नही होती। लेकिन कोई अगर 100 फीसदी दिव्यांग हो जाये तो जीवन नर्क हो जाता है। ऐसा शख्स हर एक चीज के लिए दुसरो पर आश्रित हो जाता है। (Skill level) लेकिन 100 फीसदी दिव्यांग जगमोहन ठाकुर ने कुदरत के कहर को मात दे दी है। उसने अपनी मेहनत,अपने जज्बे अपनी कला से, किस्मत की लकीरों का रुख पलट कर रख दिया।
(Skill level) जन्म से दिव्यांग जगमोहन जन्म से ही इलेक्ट्रॉनिक में रुचि रखते हैं। तीसरी जमात के बाद उन्होंने पाठशाला छोड़ दी और अपनी रुचि की पाठशाला खुद शुरू कर दी।

कई जिलों में विख्यात है जगमोहन
बहरहाल आज जगमोहन का नाम कई जिलों में विख्यात हो चुका है। इसके पीछे कारण है मोटर वाली ट्राइसिकल की रिपेयरिंग में मास्टरी, समाज कल्याण विभाग जो मुफ्त में ट्राइसिकल बंटता है। उनमें जो भी खराबी आती है। उसके लिए जगमोहन को बुलाया जाता है। ये सिर्फ धमतरी में नही बल्कि कई जिलों में होता है। इस तरह से जगमोहन आज तक करीब 10 हज़ार ट्राइसिकल ठीक कर चुके हैं। इससे उन्हें ठीक ठाक कमाई भी हो जाती है और वो अपने जैसे दिव्यांगों की मदद भी कर पाते हैं। जगमोहन कहते है कि वो ऐसा कम्प्यूटर बनाना चाहते है जो बिना बीजली बिना बैटरी के चल जाये।

जगमोहन के हुनर से अधिकारी हैरान
जगमोहन रायपुर के भाठागांव में रहते हैं। जब भी उन्हें किसी जिले से बुलावा आता है वो अपनी पत्नी और बेटी के साथ निकल पड़ते हैं। वहीँ सरकारी अधिकारी जगमोहन के हुनर से हैरान रहते हैं। उसकी तारीफ करते नही थकते जिनके हाथ पाव सलामत है, शरीर मजबूत है और वो बेरोजगारी का रोना रोता है उसे जगमोहन से मिलना चाहिए।