सरगुजा कांग्रेस में बदले समीकरण: सिंहदेव-भगत फिर साथ, 2028 की तैयारी में जुटा संगठन

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में कांग्रेस की सियासत नए मोड़ पर नजर आ रही है। 2023 के विधानसभा चुनाव में संभाग की सभी 14 सीटें गंवाने के बाद पार्टी अब संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने में जुटी है। इसी बीच पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव और पूर्व मंत्री अमरजीत भगत की बढ़ती नजदीकियां राजनीतिक तौर पर चर्चा का विषय बन गई हैं। दोनों नेता हाल के दिनों में एक साथ कार्यक्रमों और संगठनात्मक बैठकों में नजर आ रहे हैं।

सिंहदेव ने सरगुजा समेत पूरे छत्तीसगढ़ में अपना दौरा बढ़ाया है। वे विधानसभा क्षेत्रों में पहुंचकर कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर रहे हैं। उनका कहना है कि अब उनका लक्ष्य किसी पद की दौड़ नहीं, बल्कि प्रदेश में दोबारा कांग्रेस की सरकार बनाना है। इसी अभियान में अमरजीत भगत का साथ मिलना पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है।

कभी अलग-अलग खेमों में थे दोनों नेता

राज्य गठन के बाद अमरजीत भगत अजीत जोगी के करीबी माने जाते थे। 2003 में पहली बार सीतापुर से विधायक चुने गए और लगातार चार बार विधानसभा पहुंचे। 2018 में कांग्रेस की सरकार बनने के बाद उनका झुकाव तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर बढ़ा। उस दौर में सिंहदेव और भगत के बीच राजनीतिक दूरी साफ दिखाई देती थी।

सत्ता जाने के बाद बदले समीकरण

2023 में कांग्रेस की सत्ता जाने के बाद दोनों नेताओं के बीच समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं। सीतापुर और मैनपाट में संगठन सृजन की बैठकों के दौरान दोनों साथ दिखाई दिए। सिंहदेव के दौरे में भगत की सक्रिय मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं के बीच भी चर्चा बढ़ाई है।

कांग्रेस के लिए यह गठजोड़ इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों नेताओं का सरगुजा में अलग-अलग स्तर पर मजबूत जनाधार और संगठनात्मक प्रभाव रहा है। ऐसे में 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों का साथ आना उत्तर छत्तीसगढ़ में पार्टी की रणनीति को नई दिशा दे सकता है। फिलहाल कांग्रेस बूथ स्तर पर संगठन मजबूत कर पुराने प्रभाव को वापस पाने की कोशिश में जुटी है।

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